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धार्मिक साहित्य Discussions (168)

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अनुष्टुप छंद

अनुष्टुप छंद यह छन्द न पूर्णतयः मात्रिक है, न ही पूर्णतयः वार्णिक। इसमें चार चरण होते हैं। हर चरण में आठ वर्ण होते हैं - पर मात्राएँ सबमें…

Started by SANDEEP KUMAR PATEL

2 Dec 30, 2017
Reply by SANDEEP KUMAR PATEL

मौसे कह गयो थो कान्हा (कविता)

मौसे कह गयो थो कान्हा बेगी ही आ जावेगो सलौनी सन्ध्या हो चली है जाने कब वो आवेगो माखन देखो सूख गयो है धूप में कान्हा जब से गयो है हाय हाय अ…

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़')

0 Oct 12, 2017

शक्ति के रूप

शक्ति के रूप  (मौलिक एवं अप्रकाशित ) हिमालय की लाली मां, हैं बैल पर सवार | दिव्य रूप हाथ त्रिशूल, सुशोभित पद्म सार ||   सत्व सत्ता प्रकृति…

Started by VINOD GUPTA

2 Sep 6, 2017
Reply by VINOD GUPTA

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो , मो कहूँ आवत नाही कबहू -२ ना मुख चंद्र दिखायो , मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो। बहुत सुनिन्ह है तोरे…

Started by Mohit mishra (mukt)

2 Aug 30, 2017
Reply by Mohit mishra (mukt)

कान्हा को नाच नचा गयी राधा

बैरिन बंशी चुराने चली जब तो पहले सकुचा गयी राधा चोरी से चुपके से हौले से धीरे से कान्हा की आँख बचा गयी राधा पूछा किये मुरलीधर श्याम तो लीला…

Started by Alok Rawat

2 Aug 29, 2017
Reply by Alok Rawat

राधा राधा नाम रटे

राधा राधा नाम रटे, सारे बन्धन तुरंत कटे। आप तरे भवसागर से, युक्त रहे नटनागर से।। नाम धन जो लूटेगा,  चौरासी से छूटेगा।। गाएंगे जो प्रेम से…

Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा

0 Aug 29, 2017

राधा प्रियस्वामिनि

हे राधा प्रियस्वामिनि, तेरी किरपा किरण दामिनि मोह तम को हरे, कृतकृत्य करे, माता आपके पावन चरण। श्री राधे की बोले जो जय, उसको भव का नहीं हो…

Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा

5 Aug 29, 2017
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

छप्पय छंद

जय जय जय हनुमान, ज्ञान-गुण उर में भर दो। सदा रहो मम ध्यान, तेजमय तन-मन कर दो।। जला सत्य की ज्योंति, तमस हिय के हर लो सब। बल-बुद्धि-विद्या-ध…

Started by रामबली गुप्ता

1 Aug 28, 2017
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

भुजंगप्रयात छन्द

जपो नाम कान्हा वही है सहारा। वही तारता है वही है किनारा।। करे धर्म रक्षा वही मोक्षदाता। अरे विश्व का है वही तो विधाता।१। उसी के सहारे धरा…

Started by डॉ पवन मिश्र

1 Aug 28, 2017
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

श्रीवृन्दावनधाम अपार, जपे जा राधेराधे

कदम्ब कुंज वनमाली, वो नाचे दे दे ताली। छलिया को नचावनहार... जपे जा राधेराधे सखियन बिच कुंज बिहारी, संग सोहें राधा प्यारी। सब वेदन को ये सार…

Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा

1 Aug 28, 2017
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

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"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
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"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
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"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
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सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
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  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
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