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अनुष्टुप छंदअनुष्टुप छंद यह छन्द न पूर्णतयः मात्रिक है, न ही पूर्णतयः वार्णिक। इसमें चार चरण होते हैं। हर चरण में आठ वर्ण होते हैं - पर मात्राएँ सबमें… Started by SANDEEP KUMAR PATEL |
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Dec 30, 2017 Reply by SANDEEP KUMAR PATEL |
मौसे कह गयो थो कान्हा (कविता)मौसे कह गयो थो कान्हा बेगी ही आ जावेगो सलौनी सन्ध्या हो चली है जाने कब वो आवेगो माखन देखो सूख गयो है धूप में कान्हा जब से गयो है हाय हाय अ… Started by KALPANA BHATT ('रौनक़') |
0 | Oct 12, 2017 |
शक्ति के रूपशक्ति के रूप (मौलिक एवं अप्रकाशित ) हिमालय की लाली मां, हैं बैल पर सवार | दिव्य रूप हाथ त्रिशूल, सुशोभित पद्म सार || सत्व सत्ता प्रकृति… Started by VINOD GUPTA |
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Sep 6, 2017 Reply by VINOD GUPTA |
मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायोमेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो , मो कहूँ आवत नाही कबहू -२ ना मुख चंद्र दिखायो , मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो। बहुत सुनिन्ह है तोरे… Started by Mohit mishra (mukt) |
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Aug 30, 2017 Reply by Mohit mishra (mukt) |
कान्हा को नाच नचा गयी राधाबैरिन बंशी चुराने चली जब तो पहले सकुचा गयी राधा चोरी से चुपके से हौले से धीरे से कान्हा की आँख बचा गयी राधा पूछा किये मुरलीधर श्याम तो लीला… Started by Alok Rawat |
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Aug 29, 2017 Reply by Alok Rawat |
राधा राधा नाम रटेराधा राधा नाम रटे, सारे बन्धन तुरंत कटे। आप तरे भवसागर से, युक्त रहे नटनागर से।। नाम धन जो लूटेगा, चौरासी से छूटेगा।। गाएंगे जो प्रेम से… Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा |
0 | Aug 29, 2017 |
राधा प्रियस्वामिनिहे राधा प्रियस्वामिनि, तेरी किरपा किरण दामिनि मोह तम को हरे, कृतकृत्य करे, माता आपके पावन चरण। श्री राधे की बोले जो जय, उसको भव का नहीं हो… Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा |
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Aug 29, 2017 Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') |
छप्पय छंदजय जय जय हनुमान, ज्ञान-गुण उर में भर दो। सदा रहो मम ध्यान, तेजमय तन-मन कर दो।। जला सत्य की ज्योंति, तमस हिय के हर लो सब। बल-बुद्धि-विद्या-ध… Started by रामबली गुप्ता |
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Aug 28, 2017 Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') |
भुजंगप्रयात छन्दजपो नाम कान्हा वही है सहारा। वही तारता है वही है किनारा।। करे धर्म रक्षा वही मोक्षदाता। अरे विश्व का है वही तो विधाता।१। उसी के सहारे धरा… Started by डॉ पवन मिश्र |
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Aug 28, 2017 Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') |
श्रीवृन्दावनधाम अपार, जपे जा राधेराधेकदम्ब कुंज वनमाली, वो नाचे दे दे ताली। छलिया को नचावनहार... जपे जा राधेराधे सखियन बिच कुंज बिहारी, संग सोहें राधा प्यारी। सब वेदन को ये सार… Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा |
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Aug 28, 2017 Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') |
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