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भोजपुरी साहित्य Discussions (250)

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भोजपुरी गजल लिखे के कोशिश

भोजपुरी गजल लिखे के कोशिश  तहरा इयाद के सहारे जीवन बिता देम ,तू चाह त गोरी तोहके आपन बना लेम ,  मन में बसल बारू तू मेहमान बन के , चाह्बू…

Started by Rash Bihari Ravi

3 Aug 3, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

देखि केतना परेशान हम बानी

एगो लड़की के बाप हम बानी , देखि केतना परेशान हम बानी     सगरी धन पढ़ाई में ओराइल , बेटी पढ़ल बड़ा खुश हम बानी     बचपन से पढ़वनी मर मर के ,…

Started by Rash Bihari Ravi

3 Aug 2, 2011
Reply by आशीष यादव

इ का हो रहल बा ,

इ का हो रहल बा , समझ में नइखे आवत , का मनमोहन बाबु के, बुद्धि कही चरे चल गइल बा,कि उनकर बछरुआ , सब के सब बे हाथ हो गइल बा, एगो राजा साहेब ब…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Jul 26, 2011
Reply by shrikantpandey

सावन महिना मन भावन लागेला सुहावन हो ,

सावन महिना मन भावन लागेला सुहावन हो , आवs बलम चली आवs उठईब हम कावर हो , सुनी ले कि सुनेले मनवा के बतिया पूरा करेले , प्रभु हमारो बिपतिया ना…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Jul 21, 2011

हो गइनी मजबूर हजूर जब मालिक किनले गाड़ी ,

हो गइनी मजबूर हजूर जब मालिक किनले गाड़ी , बन गइनी बंजारा छुट गइल हमार घर बाड़ी , आज इहा कल उहा रहिले जब ले चक्का घुमेला , हो जाला ख़राब गा…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Jul 6, 2011
Reply by आशीष यादव

बतकही ( गपसप ) अंक ७

बतकही ( गपसप ) अंक ७ हम एक हप्ता खातिर नासिक का गइनी कि लछुमन भाई के चाय दोकान पर के बईठका एक दमे ख़तम, आदत के मोताबिक हम सुबेरे पहुच गइनी,…

Started by Rash Bihari Ravi

5 Jun 23, 2011
Reply by Shakur Khan

बतकही ( गपसप ) अंक 6

बतकही ( गपसप ) अंक 6 लछुमन भाई के चाय दुकान पर गहमा गहमी रहुऐ बाकिर लछुमन भाई के चेहरा उतरल रहुऐ, हमरा के देख के उ ब़ोलुअन प्रणाम गुरु जी ब…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Jun 13, 2011
Reply by Saurabh Pandey

भक्त अपने भगवान से.

भक्त अपने भगवान से. खेल खेलिला राउर नज़ारा रहल, हम नाचीं ला राउर इशारा रहल. चाहे प्यारा रहल या किनारा रहल, जे बा आईल राउरे सहारा रहल. चाहे…

Started by R N Tiwari

0 Jun 10, 2011

बतकही ( गपसप ) अंक 5

 बतकही ( गपसप ) अंक 5 लछुमन भाई के चाय दुकान बंद रहे उनकर दुकान के सामने रोज के अपेक्षा लोग कम रहे, आदत के अनुसार हम उहा पहुच गईनी हमरा…

Started by Rash Bihari Ravi

6 Jun 8, 2011
Reply by Neelam Upadhyaya

फूट फूट के रोवत बाड़ी महतारी भारती,

फूट फूट के रोवत बाड़ी महतारी भारती, कईसन कुलछना के माई हम कहइनी, बे शरमा इ मूंग दरत बा माई के हो छाती, हमरा त इ लागत बाटे होगइल कुल घाती…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Jun 6, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

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Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
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जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
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Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
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"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
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Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
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"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
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Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
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सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
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