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बीहनि कथा का विश्व परिदृष्य

अभी दो-चार दिन से फेसबुक हिंदी में Six Word Stories बहुत लोकप्रिय है। मगर मैथिली भाषा मे इसका सुचिंतित विमर्श "विदेह" पत्रिका के संपादकीय में पहले ही हो चुका था। इसी संदर्भ मे जब मैनें उक्त सूचना को फेसबुक पर शेयर किया तो आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी ने मैथिली के इस संपादकीय को हिंदी अनुवाद करने का निर्देश किया और उसीका परिणाम है यह अनुवाद । विदेह पत्रिका के संपादक हैं गजेन्द्र ठाकुर । विदेह पत्रिका के पुराने अंकों को नेट पर देखा जा सकता है । 

 

मैथिली भाषा मे गजेन्द्र ठाकुर की गिनती वैसे साहित्यकार मे होती जो एक साथ साहित्य भी रचते है, शब्दकोश भी बनाते हैं और रिसर्च भी करते हैं । 13 वीं शताब्दी से मिथिला मे प्रचलित पंजीप्रथा पर उनका शोध वृहत है । पंजीप्रथा आज के सरकारी विवाह के समान ही है । मगर इन सब को छोड़कर नये लेखक को प्रोत्साहित करना गजेन्द्र ठाकुर की सबसे बड़ी विशेषता है । करीब 2004 से ब्लागिंग कर रहे ठाकुर जी 2008 मे अपने पुराने ब्लाग को पाक्षिक पत्रिका मे बदल दिया जिसका नाम "विदेह" है ।

इस पत्रिका के संपादक के तौर पर ठाकुरजी ने मात्र आठ साल मे लगभग 70 से उपर नये लेखक मैथिली भाषा को दिये।

इस संपादकीय में आये "बीहनि कथा" को हिंदी के "लघुकथा" के समांनातर समझा जा सकता है।

 

 

बीहनि कथा का विश्व परिदृष्य

 

गजेन्द्र ठाकुर

 

अपने एक पंक्ति, दो पंक्ति, एक पैराग्राफ, दो पैराग्राफ के अति लघुकथा के लिये अंग्रेजी साहित्यमे एक नव विधा का अविष्कार करने वाली लिडिया डेविस की लेखनी लघुकथा; उपन्यास और कविता के जेनेरिक वर्गीकरण को नहीं मानता है और वह लेखकीय स्वतंत्रता का पक्षधर है। उनकी कुछ लघुकथाएँ कविता के जैसी हैं, तो कुछ लेख-निबंध के जैसी । उनकी ही कुछ अति लघुकथा तिलमिलाने वाली नहीं है बल्कि इलियट के "आबजरवेशन" जैसी हैं, बिना किसी भाव की, जिसमें भावना पाठ के अंतर में है बाहर में नहीं।

एक इंटरव्यू में जब लिडिया डेविस से पूछा गया कि क्या "फ्लैश फिक्शन", "लघु-लघुकथा", "गद्य कविता (प्रोज-पोयम) या "प्रोयम" आदि का बहुत वर्गीकरण साहित्य में होना चाहिये तो उन्होनें उत्तर दिया था कि यदि नये वर्गीकरण की जरूरत महसूस हो रही है, तो वर्गीकरण होगा ही और स्वीकार भी किया जायेगा भले ही उसमें कुछ समय लगे। लिडिया डेविस कथा को कविता के मुकाबले लचीला मानती हैं और गद्य कविता को कथा के नाम से संबोधित करती हैं। लिडिया डेविस को 2013 के मैन बुकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सैमुएल बेकिट, फ्रैन्ज काफ्का और जार्ज लुइस बोग्रेस की कथाएँ भी एक पन्ना से एक सौ पृष्ठ तक जाती हैं, मगर इन तीनों से अलग हैं । फेलिक्स फेनिअन जिनकी एक हजार से ऊपर तीन पंक्ति की उपन्यास का संग्रह 1940 मे आया और इसका अंग्रेजी अनुवाद 2007 मे " नोवेल्स इन थ्री लाइन" के नाम से प्रकाशित हुआ। फ्रेंच मे इसका शाब्दिक अर्थ "लघु उपन्यास" और "समाचार' दोनों होता है । वस्तुतः फेलिक्स फेनिअन ने अपने समय का "समाचार" ही लिखा, जो एक विधा के रूप मे प्रतिष्ठित हो गया।

अरन्सट हेमिंगवे का छह शब्द की कथा ""For sale: baby shoes, never worn" में कथा का तीनों मूल तत्व है। प्रारंभ "For sale: मध्य baby shoes, अंत never worn । यह फ्लैश फिक्शन का अतिसूक्ष्म रूप है। वैसे इस कथा से हेमिंगवे का संबंध है कि नहीं, यह विवाद का विषय है ॥ क्योंकि हेमिंगवे की मृत्यु के 30 साल बाद 1991 मे इस कथा का सबंध उनके साथ जोड़ा गया। वैसे इस तरह का प्रयोग, जैसे "six word memoirs" सीरीज, लोकप्रिय रहा, जो आन लाइन SMITH Magazine में प्रकाशित है।

मैथिली में एक स्थापित होती विधा के लिये नये वर्गीकरण की जरूरत महसूस हुई और नया नाम देकर इसे स्वीकार भी किया गया और "फ्लैश फिक्शन", "लघु-लघुकथा", "गद्य कविता (प्रोज-पोयम) या "प्रोयम" और "आबजरवेशन" की तरह "सीड स्टोरी" के रूप मे चिन्हित किया गया।

 

"मौलिक और अप्रकाशित" 

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इस सूचनात्मक विवरण के लिए हार्दिक धन्यवाद भाई आशीष अनचिन्हार जी. बीहनि कथा का मैथिली साहित्य में जिस तरह से इन्फ़्यूज़न हुआ है वह चकित भी करता है और इस भाषा के वैश्विक जुड़ाव के पहलू भी उद्घाटित करता है. भाषाएँ अपनी तमाम सीमाओं के बावज़ूद अपने व्यवहार और विस्तार में वैश्विक हुआ करती हैं. बीहनि कथा पर यह आलेख इसका एक ज्वाजल्यमान उदाहरण है. आदरणीय गजेन्द्र ठाकुर जी के प्रति सादर नमन.  

मेरे कहे के अनुसार अपनी व्यस्तता के बावज़ूद समय देते हुए आलेख के सक्षम अनुवाद को प्रस्तुत कर ओबीओ के पटल को समृद्ध करने केलिए हार्दिक धन्यवाद.

शुभेच्छाएँ

 

जी धन्यवाद।

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