For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

ओपन बुक्स ऑनलाइन के सभी सदस्यों को प्रणाम, बहुत दिनों से मेरे मन मे एक विचार आ रहा था कि एक ऐसा फोरम भी होना चाहिये जिसमे हम लोग अपने सदस्यों की ख़ुशी और गम को नजदीक से महसूस कर सके, इसी बात को ध्यान मे रखकर यह फोरम प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमे सदस्य गण एक दूसरे के सुख और दुःख की बातो को यहाँ लिख सकते है और एक दूसरे के सुख दुःख मे शामिल हो सकते है |

धन्यवाद सहित
आप सब का अपना
ADMIN
OBO

Views: 80790

Reply to This

Replies to This Discussion

शायद कल थी ठोकी देशी, तभी बहकते फिरें गणेशी
मेरे परदादा के भाई,  इनको लाज तनिक नहि आई   

तुम सबके पोतों के पोते - काहे इंतना व्याकुल होते
अब जो चुप ना बैठे भाऊ, चाचा से कर दूँगा "ताऊ"  

जय हो, जय हो गांजा घोलें । ’परदादा के भाई’ बोलें ॥
परम पूज्य हैं सदा प्रभाकर । मगन गनेसी बबुआ पाकर ॥

’तुम’ का मतलब समझ न आया । पर ’पोते का पोता’ पाया ॥
चाहे  कोई  रिश्ता  मानो ।  नेह  हृदय  में  बहता  जानो ॥

जो कहना हो पहले तोलो, तोल मोल कर ही कुछ बोलो  
जाने दिल्ली और दोआबा, "बेबी" को भी कहते "बाबा" 

भई मिरासी सुत जो होता, रोता भी तो सुर में रोता
जो छंदों की काया माया, ओबीओ से है सब पाया,

ऐसा  काहे  कहें  गुसाईं । गुड़ही नहीं, भले ही झाईं ॥
लेकिन जीम 'जबेली' आली । योगी खाली करते थाली॥
हा हा हा हा...

भोजपुरिन की बात निराली। खुद तो खाते भर भर थाली
योगी मांगे जभे जलेबी ! बागी सौरभ भएँ फरेबी !

खाने पर क्या साहब ताना । हमने देखे हैं भट नाना ॥
अधध पसेरी चखना करते । तिसपर हाँड़ी चावल धरते ॥
बल्टी बुनिया दही कनस्तर । कढ़ी-फुलौरे छइँटी भर-भर ॥
गिने जलेबी या रसगुल्ला । समझो पाहुन हैं दुमदुल्ला ||
:-))

मैं भी पहुँची पार्टी में लेट, ओ बी ओ का खुला था गेट  

कर रही थी बकरी एक जुगाली, बजा रहे गणेश थे ताली

थी बात बड़ी नाइंसाफी वाली, सभी रखी थीं खाली थाली   

एक और बात बेतुकी हुई, न ही कोई जबेली बची थी मुई 

खाकर चले गये सब यार, तब योगी पहुँचे टपकाते लार

टेबिल के नीचे देख रसगुल्ले, हो गई उनकी वल्ले-वल्ले

एक उठाकर खाली प्लेट, सब रसगुल्ले उसमे लिये समेट 

मैं भी लपकी पर स्लो था नेट, नहीं कर सके वह मेरा वेट

योगी भाई ने छुपकर खाया, पर गणेश को नहीं बताया l

:):)

शन्नोजी आशीष दें, हृदय कहे आभार
बनी रहे शुभकामना, औ’ आपस में प्यार

सादर आभार आदरणीया शन्नोजी..

सौरभ जी के जन्मदिवस की खुशी में मुँह भी मीठा करती चलूँ....मुफ्त की जलेबियाँ रोज तो मिलती नहीं :):):):) 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।संबंधों को निभा रहे, जैसे हो दस्तूर…See More
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"समसामयिक विषय है ये। रियायत को ठुकराकर अपनी काबलियत से आगे बढ़ना अच्छा है,पर इतना स्वाभिमान कम ही…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। समसामयिक और सदाबहार विषय और मुद्दों पर सकारात्मक और…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service