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मिथिलेश वामनकर's Discussions (7,390)

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"आदरणीय नादिर खान सर, शानदार ग़ज़ल हुई है मतला से लेकर मक्ता तक एक से बढ़कर एक शेर हुए ह…"

मिथिलेश वामनकर replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"आदरणीय शिज्जू भाई जी शानदार ग़ज़ल हुई है. आपने एक से बढ़कर एक शेर कहें हैं. इन दो अशआर…"

मिथिलेश वामनकर replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"आदरणीय समर कबीर जी, आप जैसे उस्ताद की ग़ज़ल से गुजरना ही अपने आप में एक सुखद अनुभव होत…"

मिथिलेश वामनकर replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"आदरणीय नादिर खान सर,  ग़ज़ल पर सराहना और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका  हार्दिक…"

मिथिलेश वामनकर replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"आदरणीय जयनित जी, ग़ज़ल पर सराहना और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका  हार्दिक आभार.…"

मिथिलेश वामनकर replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"आदरणीय शिज्जू भाई जी, ग़ज़ल पर आपकी सराहना, सकारात्मक और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लि…"

मिथिलेश वामनकर replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"मोह-माया से जनित खेल से हटकर देखो ज़िन्दगी जा रही किस ओर, बराबर देखो मित्र जीवन कभी…"

मिथिलेश वामनकर replied Nov 27, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-65

555 Nov 28, 2015
Reply by योगराज प्रभाकर

"वाह वाह "

मिथिलेश वामनकर replied Nov 18, 2015 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"परम आदरणीय योगराज प्रभाकर सर, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें..."

मिथिलेश वामनकर replied Nov 18, 2015 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"ओपन बुक्स ऑनलाइन के प्रधान संपादक परम आदरणीय योगराज प्रभाकर सर, ओपन बुक्स ऑनलाइन परि…"

मिथिलेश वामनकर replied Nov 18, 2015 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

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काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
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  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
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दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
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Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

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दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
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