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जनतंत्र में जयकार की जय - डॉo विजय शंकर

कोई ये दावा कर के बैठा है ,
कोई वो दावा करके बैठा है ,
कहाँ रह गए गरीबी मिटाने वाले ,
सबसे आगे तो वो निकला
जो रोटी रोटी पे अपनी तस्वीर
चिपका के बैठा है।
क्या बात है ,
हर बात में तेरी जय ,
हर खुशी में तेरी जय ,
हर गमी में तेरी जय ,
फसल अच्छी तो तेरी जय ,
पड़े सूखा तो तेरी जय ,
हर आपदा में जय ,
जय , सिर्फ तेरी जय ,
खाए तो तेरी जय ,
भूखा हो तो तेरी जय ,
जिए तो तेरी जय
मरे तो तेरी जय ,
जिंदगी रहे या जाए ,
बनी रहे तेरी जय ,
बस तेरी जय ,
बस तेरी जय।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by vijay nikore on December 16, 2015 at 2:59pm

अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय विजय जी।

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 7, 2015 at 10:16pm
आभार एवं धन्यवाद , आदरणीय मोहन बेगोवान जी , सादर।
Comment by मोहन बेगोवाल on December 6, 2015 at 10:13pm

  बहुत सुंदर नज्म कही आपजी ने बधाई हो 

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 6, 2015 at 8:41pm
आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी , आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on December 6, 2015 at 8:40pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी , आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on December 6, 2015 at 8:39pm
आदरणीय आर्यपुत्र सनी जाट स्वदेशी जी , आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on December 6, 2015 at 8:38pm
आदरणीय लक्षमण धामी जी , आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 6, 2015 at 12:16pm

सही कहा  सर !  हर हालत में जय उन्ही की है  .सादर .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 6, 2015 at 11:05am

सत्य वचन , आदरनीय विजय भाई , सब कुछ राजनीति  मे जय कारे के लिये होती है । बधाई आपको रचना के लिये ।

Comment by आर्यपुत्र सनी जाट स्वदेशी on December 5, 2015 at 11:20pm
बहुत खूब

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