For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विकासोन्मुखी (लघुकथा)

"ख़ामोश!" एक बलात्कार पीड़िता और सरेआम उसकी हत्या करने वाले युवकों के बाद बारी-बारी से माइक पर उसने मशहूर नेताओं-अभिनेताओं और पुलिसकर्मियों की मिमिक्री करते हुए कहा, "कितने आदमी थे!"


"साहब, ती..ई...तीन थे!"


"वे तीन थे ... और ये सब तीस-चालीस...ऐं! लानत है... तुम लोगों की ख़ामोशी पर!"
"साला... एक मच्छर इस देश के आदमी को हिजड़ा बना देता है!"


"साहब... मच्छर! .. मच्छर बोले तो... पैसा, डर, पुलिस, नेता, क़ानून या स्वार्थ!..है न!"


"कोई शक़!"


'नारी सशक्तिकरण और बलात्कार' विमर्श पर एक आयोजन में दर्शक इस प्रस्तुति पर पिछली बार से अधिक ज़ोर से देर तक तालियाँ बजाते रहे! विशिष्ट अतिथि दीर्घा में बैठे किन्नर सब तरफ़ निगाहें घुमाते हुए एक-दूसरे की ओर देख कर मुस्कराने लगे।


ठीक तभी ...


"हाss हाss हाss हाss हाsss " वह माइक पर रावण की मिमिक्री करते हुए बोला, "मैं कालग्रस्त नहीं, अद्यतन हूँ.. कालजयी हूँ! मैं दशानन नहीं जी, नयी सदी का शतानन... सहस्त्रानन हूँ... विकासोन्मुखी हूं... हा हा हा हा!"


दर्शक ख़ामोश हो गये!


(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 253

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 12, 2019 at 1:58am

आदाब। आपकी यहाँ उपस्थिति हमें गौरवान्वित करती है। अनुमोदन और प्रोत्साहन के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब समर कबीर साहिब। 

Comment by Samar kabeer on October 11, 2019 at 7:01pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 8, 2019 at 9:17pm

आदाब। मेरी रचना के पटल पर त्वरित उपस्थिति और राय साझा करते हुए मुझे यूं प्रोत्साहित करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया जनाब तेजवीर सिंह साहिब। विजयादशमी पर्व पर हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं।

Comment by TEJ VEER SINGH on October 8, 2019 at 2:47pm

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।प्रतीकों के माध्यम से समाज में व्याप्त अनगिनत बुराइयों को सशक्त लघुकथा के रूप में प्रस्तुत करने का सराहनीय कदम।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)

212  /  1222  /  212  /  1222दुनिया के गुलिस्ताँ में फूल सब हसीं हैं परएक मुल्क ऐसा है जो बला का है…See More
25 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted blog posts
25 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post न इतने सवाल कर- ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा साहिब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने, इस पर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल करें।…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"ठीक है, एडिट कर दें ।"
3 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

ख़्वाबों के रेशमी धागों से .......

ख़्वाबों के रेशमी धागों से .......कितना बेतरतीब सा लगता है आसमान का वो हिस्सा जो बुना था हमने…See More
3 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

न इतने सवाल कर- ग़ज़ल

प्यारी सी ज़िंदगी से न इतने सवाल कर,जो भी मिला है प्यार से रख ले सँभाल कर.तदबीर के बगैर तो मिलता…See More
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

मगर हम स्वेद के गायें - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

१२२२ × ४ कहीं पर भूख  पसरी  है  फटे कपड़े पुराने हैं भला मैं कैसे कह दूँ ये सभी के दिन सुहाने हैं।१।…See More
3 hours ago
सालिक गणवीर's blog post was featured

ग़ज़ल ( जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी...)

(221 2121 1221 212)जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी हँस,खेल,मुस्कुरा तू क़ज़ा से न डर अभीआयेंगे…See More
3 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद''s blog post was featured

चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)

212  /  1222  /  212  /  1222दुनिया के गुलिस्ताँ में फूल सब हसीं हैं परएक मुल्क ऐसा है जो बला का है…See More
3 hours ago
Sushil Sarna's blog post was featured

550 वीं रचना मंच को सादर समर्पित : सावनी दोहे :

गौर वर्ण पर नाचती, सावन की बौछार। श्वेत वसन से झाँकता, रूप अनूप अपार।। १ चम चम चमके दामिनी, मेघ…See More
3 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार आपको, आपकी हौसलाअफजाई के लिए बेहद शुक्रगुजार हूँ, आप पारिवारिक…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post क्यों ना जड़ पर चोट ?
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन । अच्छी कविता हुई है । हार्दिक बधाई ।"
9 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service