For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

फूल महकते हैं

वे सिर्फ महकते नहीं

अपितु देते हैं एक संदेश

कि अपने भीतर

आप भी भर लें

इतनी महक

कि आपका अस्तित्व ही

बन जाए परिमल

और वह महकाये पूरे विश्व को

बिना किसी यात्रा या भ्रमण के

और खुद दुनिया भर से लोग

आयें तुम्हारे पास

तुम्हारे सुवास से आकर्षित होकर

तुम्हारे परिमल की

एक गंध पाने को

जैसा टूट पड़ते हैं  शलभ

किसी दिए पर

बिना किये अपने प्राणों की परवाह

पर तुम जलाना मत

उन्हें  सिर्फ देना

अपनी महक 

क्योंकि महक  ही है

सही मायने में

भक्ति और प्रेम का सार

(मौलिक /अप्रकाशित )

Views: 76

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on July 20, 2019 at 8:34pm

जनाब गोपाल नारायण जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on July 19, 2019 at 1:35pm

बहुत खुब

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब अजय साहिब, गज़ल पसन्द करने और आपकी इस इनायत का बहुत बहुत शुक्रिया "
3 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब रवि साहिब, गज़ल पसन्द करने और आपकी इस इनायत का बहुत बहुत शुक्रिया जनाब "
4 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब अमित कुमार साहिब, गज़ल पसन्द करने और आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
5 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब समर साहिब आ दाब, आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
6 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब अमित साहिब, गज़ल पसन्द करने और आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
7 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब रवि शाहिद साहिब, गज़ल पसन्द करने और आपकी हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
8 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब भाई लक्ष्मण धामी साहिब, गज़ल पसन्द करने और आपकी इस इनायत का बहुत बहुत शुक्रिया "
8 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब भाई लक्ष्मण धामी साहिब, हिन्दी और उर्दू के शब्दों से सजी अच्छी गज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल…"
9 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"जनाब रवि शाहिद साहिब, अच्छी गज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं "
13 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post हमारा दीपक - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी।"
16 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय अनीस साहब, इस उम्दा ग़ज़ल पर आपको हार्दिक बधाई।"
40 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-115
"आदरणीय सुरेन्द्र भाई, उम्दा ग़ज़ल कहने पर बधाई। ख़ास तौर पे दूसरा शे'अर बहुत अच्छा लगा।"
1 hour ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service