For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सूर्यास्त के बाद

निर्जन समुद्र तट

रहस्यमय सागर सपाट अपार

उछल-उछलकर मानो कोई भेद खोलती

बार-बार टूट-टूट पड़ती लहरें ...

प्यार के कितने किनारे तोड़ 

तुम भी तो ऐसे ही स्नेह-सागर में

मुझमें छलक-छलक जाना चाहती थी

कोमल सपने से जगकर आता

हाय, प्यार का वह अजीब अनुभव !

डूबते सूरज की आख़री लकीर

विद्रोही-सी, निर्दोष समय को बहकाती

लिए अपनी उदास कहानी

स्वयँ डूब जा रही है ...

आँसू भरी हँसी लिए ओठों पर

जैसे तुम मुझको हँसाती-बहकाती

अन्तस्थ में थामे कोई मूक संवेदन

हर विदाई में सिर मेरी गोदी में रख

घबराकर खुद रो-रो देती थी

अब स्वप्नातीत महाशून्य

थल से सागर से सागर तक

गहराता अकेलापन

अकल्पित सन्नाटा

अन्धकार-अम्बर में अब

अँधेरा रौशनी से ज़्यादा पुराना

ज़्यादा पहचाना लगता है

अनिश्चित साँसों के पीले सूर्यास्त में

भटका करती स्मृतियों के दरवाज़े खोल-खोल

मेरे हाथों में उष्मा भरते तुम्हारे स्नेहिल हाथ

अनजाने, मैं संकुचित और भयभीत

बहुत भारी हो रहा है अब

उमढ़ते प्यार का वह

हृदयभेदी "अजीब" अनुभव

                   -------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 37

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on June 23, 2019 at 4:14pm

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय भाई समर कबीर जी। आपके स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना है।

Comment by vijay nikore on June 23, 2019 at 4:12pm

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय सुशील जी।

Comment by Samar kabeer on June 22, 2019 at 6:40pm

जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,बहुत उम्द:,गम्भीर,भावपूर्ण रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on June 22, 2019 at 4:37pm

वाह आदरणीय निकोर जी अंतर्मन के भावों को आप जिस तरह शब्दों में बाँध प्रवाह देते हैं ,उसकी तुलना किसी और से नहीं की जा सकती। इस भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई सर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manju Saxena is now a member of Open Books Online
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अहसास .. कुछ क्षणिकाएं
"आदरणीय  narendrasinh chauhan  जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अहसास .. कुछ क्षणिकाएं
"आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
16 hours ago
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" posted a blog post

दुर्मिल सवैया

सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा ----------जबसे वह जीत चुनाव लिए, तब से नित रौब जमावत हैं…See More
22 hours ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted blog posts
22 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

महक

फूल महकते हैंवे सिर्फ महकते नहींअपितु देते हैं एक संदेशकि अपने भीतरआप भी भर लेंइतनी महककि आपका…See More
23 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post आज फिर ...
"सरहाना के लिए हार्दिक आभार, आदरणीया प्रतिभा जी"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post बूँद-बूँद गलती मानवता
"सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय तेज वीर सिंह जी"
yesterday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on rajesh kumari's blog post दरवाज़े पर आँधी आके ठहर गई (नवगीत )
"" खुशियों की नन्हीं प्यारी सी भोली मुनिया साँसे लेती ज़ल्दी ज़ल्दी हांफ…"
yesterday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on vijay nikore's blog post गाड़ी स्टेशन छोड़ रही है
"" धुएँ की आत्मा में चीखती अब अंतिम सीटी गाड़ी अब किसी भी पल स्टेशन छोड़ने को है काल-पीढ़ित खाली…"
yesterday
विनय कुमार posted a blog post

बाढ़ का पानी- लघुकथा

सुबह से हो रही मूसलाधार बरसात रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी, अब तो दोपहर होने वाली थी. पिछले कई…See More
yesterday
vijay nikore posted blog posts
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service