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कभी ज़िंदगी से भी मिलो

कभी ज़िंदगी से भी मिलो --

ज़िंदगी ...... किसी क़ीमत पर हारती ही नही --

रक्स करती है ता उम्र जो सांसो की ताल पर ......
रोते नही देखा ..... इसे तो कभी अपने हाल पर .....

खुशियाँ मिले या मिलें गम के भारी पत्थर --

प्राणो मे बहती रासधार से देती है उत्तर --

अब मिली हुई दौलत तौलो .....

दाग सभी दिल के धो लो ....

रहने दो , किस्मत का रोना ....

सोचो तो जीवन है सोना !

 

फिर क्यूँ ना फूल से खिलो --

मिलो ..... कभी ज़िंदगी से भी मिलो ! ........... Raavi (prabha)

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 24, 2011 at 9:13am

अब मिली हुई दौलत तौलो .....

दाग सभी दिल के धो लो ....

रहने दो , किस्मत का रोना ....

सोचो तो जीवन है सोना !

 

आहा ! क्या बात है , सोचो तो जीवन है सोना ......शानदार रचना , सकरात्मक ऊर्जा से भरी हुई बहुत ही खुबसूरत रचना बन पड़ी है | रावी जी इस खुबसूरत कृति पर बधाई स्वीकार करे |

Comment by Shanno Aggarwal on June 23, 2011 at 10:10pm

बहुत शानदार रचना, प्रभा !

खुशियाँ मिले या मिलें गम के भारी पत्थर --

प्राणो मे बहती रासधार से देती है उत्तर --

अब मिली हुई दौलत तौलो .....

दाग सभी दिल के धो लो ....

रहने दो , किस्मत का रोना ....

सोचो तो जीवन है सोना !

 

फिर क्यूँ ना फूल से खिलो --

मिलो ..... कभी ज़िंदगी से भी मिलो 

 

 

Comment by Prabha Khanna on June 23, 2011 at 10:11am
... Haardik dhanyavaad Sangeeta ji ...
Comment by sangeeta swarup on June 23, 2011 at 7:00am
सकारात्मक सोच को लिए खूबसूरत रचना

कृपया ध्यान दे...

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