For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल जला गया जो गली से अभी गुजर के मुझे

1212 1122 1212 22

सिला दिया है मेरे दिल में कुछ उतर के मुझे ।
जला गया जो गली से अभी गुजर के मुझे ।।

किया हवन तो जला हाथ इस कदर अपना ।
मिले हैं दर्द पुराने सभी उभर के मुझे ।।

तमाम जुल्म सहे रोज आजमाइस में ।
चुनौतियों से मिली जिंदगी निखर के मुझे ।।

अजीब दौर है किस किस की आरजू देखूँ ।
बुला रही है क़ज़ा भी यहाँ सँवर के मुझे ।।

मिटा रहे हैं मुहब्बत की हर निशानी को।
दिखा रहे थे जो छाले कभी जिगर के मुझे ।।

नई है बात नहीं हादसों पे क्या डरना ।
हादसे खूब मिले हैं ठहर ठहर के मुझे ।।


बड़ा यकीन था जिस पर मुझे भी मुद्दत तक।
दिखा गया वो शराफत की जद मुकर के मुझे ।।

करीब आना मयस्सर नही हुआ उसको ।
वो देखता ही रहा बस निगाह भर के मुझे ।।


जला रहे थे मेरे घर को जो हवा देकर ।
वो दे रहे हैं सफाई गुनाह कर के मुझे ।।

सुना है हिज्र की तारीख़ आ रही है अब ।
खबर बता के गया है कोई सिहर के मुझे ।।

-- नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

Views: 51

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बसंत कुमार शर्मा on January 18, 2018 at 9:26pm

वाह लाजबाब अशआर, बेहतरीन गजल के लिए बहुत बहुत बधाई आपको 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सत्य नारायण सिंह जी आदाब,प्रदत्त चित्र को सार्थक करते बढ़िया शक्ति छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति…"
2 minutes ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"शुक्रिया प्रतिभा जी"
16 minutes ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"शुक्रिया बबिता जी"
17 minutes ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आपका कहना दुरुस्त है। लेकिन हिंदी में स्वाद, से, सीन सबका उच्चारण स ही है। न ही इसके साथ ग़ की तरह…"
18 minutes ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"बढ़िया प्रस्तुति"
21 minutes ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"अति सुंदर, भावपूर्ण, सन्देशपरक और विषयान्तर्गत सटीक रचना।"
23 minutes ago
Shyam Narain Verma commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post लघुकथा-पराकाष्ठा
"बहुत बढ़िया कहानी , हार्दिक बधाई आपको"
1 hour ago
Shyam Narain Verma commented on Mahendra Kumar's blog post मानव सभ्यता का इतिहास (लघुकथा)
" प्रभापूर्ण सुंदर लघु कथा के  लिए बधाई "
1 hour ago
Shyam Narain Verma commented on SudhenduOjha's blog post कर नेकी दरिया में डाल
"बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति , बधाई आप को | सादर "
1 hour ago
SudhenduOjha posted a blog post

कर नेकी दरिया में डाल

है धुआँ-धक्कड़ और बवालचेहरे-चेहरे लिक्खे सवालकर नेकी दरिया में डाल बाबा खेल-खिलांवे भइय्यानाचे…See More
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सतीश साहिब , प्रदत्त चित्र पर सुंदर चौपई छंद हुए हैं मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं | छंद 2_ पंक्ति…"
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सत्यनारायण साहिब   , प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते सुंदर शक्ति छंद हुए हैं…"
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service