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'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन

१२१२ ११२२ १२१२ २२/११२


ख़ुलूस-ओ-प्यार की उनसे उमीद कैसे हो
जो चाहते हैं कि नफ़रत शदीद कैसे हो

छुपा रखे हैं कई राज़ तुमने सीने में
तुम्हारे क़ल्ब की हासिल कलीद् कैसे हो

बुझे बुझे से दरीचे हैं ख़ुश्क आँखों के
शराब इश्क़ की इनसे कशीद् कैसे हो

हमेशा घेर कर कुछ लोग बैठे रहते हैं
अदब पे आपसे गुफ़्त-ओ-शुनीद कैसे हो

इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर
अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो
----
शदीद-सख़्त
क़ल्ब-दिल
कलीद्-चाबी
कशीद्-खींचना
गुफ़्त-ओ-शुनीद-बात चीत
पलीद-गन्दा,ग़लीज़
समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 1871

Comment

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Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:34pm
जनाब विनय कुमार जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:31pm
जनाब मोहित मिश्रा(मुक्त)साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:28pm
जनाब निलेश'नूर',साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:26pm
जनाब बृजेश कुमार'ब्रज'साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:23pm
बहना राजेश कुमारी जी आदाब,ग़ज़ल आपको पसंद आई लिखना सार्थक हुआ,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:19pm
जनाब हरि प्रकाश दुबे जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:18pm
बहना कल्पना भट्ट जी यादव,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 17, 2017 at 3:33pm

वाह ! शब्द प्रति शब्द कसावट, शेरों का गठन और, सर्वोपरि, उनकी कहन दिल की गहराइयों में उतर गयी. दिल से दाद कुबूल कीजिए, आदरणीय समर भाई. 

शुभ-शुभ

Comment by विनय कुमार on July 17, 2017 at 3:07pm

क्या कहूँ, आप को पढ़ना एक संगीत जैसा होता है, ढेरों बधाइयाँ आ समर कबीर साहब 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on July 17, 2017 at 7:57am

वाह वा. आ. समर सर... हर बार की तरह शानदार 
बधाई 

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