For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन

१२१२ ११२२ १२१२ २२/११२


ख़ुलूस-ओ-प्यार की उनसे उमीद कैसे हो
जो चाहते हैं कि नफ़रत शदीद कैसे हो

छुपा रखे हैं कई राज़ तुमने सीने में
तुम्हारे क़ल्ब की हासिल कलीद् कैसे हो

बुझे बुझे से दरीचे हैं ख़ुश्क आँखों के
शराब इश्क़ की इनसे कशीद् कैसे हो

हमेशा घेर कर कुछ लोग बैठे रहते हैं
अदब पे आपसे गुफ़्त-ओ-शुनीद कैसे हो

इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर
अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो
----
शदीद-सख़्त
क़ल्ब-दिल
कलीद्-चाबी
कशीद्-खींचना
गुफ़्त-ओ-शुनीद-बात चीत
पलीद-गन्दा,ग़लीज़
समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 1871

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by surender insan on August 1, 2017 at 9:24am
आदाब मोहतरम समर कबीर साहब । साथ में कुछ शब्दों के अर्थ होने से ग़ज़ल का पूरा आनंद आया।बेहद लाजवाब ग़ज़ल हुई जी। इस ग़ज़ल के होने की कहानी भी पढ़ी है । जिसे आपने चैलेंज की तरह लिया और बेहद ख़ूबसूरती से पूरा किया । आपका 27 साल पहले का मतला भी लाजवाब है जी। बहुत बहुत दिली मुबारक़बाद कबूल करे जी।
Comment by Samar kabeer on July 25, 2017 at 9:46pm
जी,ये तो मेरा फ़र्ज़ है, शुक्रिया ।
Comment by Ravi Shukla on July 25, 2017 at 9:01pm
आदरणीय समर साहब हमारे अनुरोध पर आपने इतनी विस्तृत टिप्पणी दे कर जो मान दिया और गजल के पीछे की कहानी से अवगत कराया उसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर
Comment by Samar kabeer on July 24, 2017 at 1:59pm
जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,ग़ज़ल आपको पसंद आई लिखना सार्थक हुआ,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by vijay nikore on July 24, 2017 at 11:42am

वाह ! इतनी दिलकश गज़ल । आप से यही उमीद रहती है और आप इस उमीद को पूरा करते हैं।

आपको ढेरों बधाई, आदरणीय भाई समर कबीर जी।

Comment by Samar kabeer on July 21, 2017 at 11:13am
जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 21, 2017 at 11:11am
जनाब रवि शुक्ला जी आदाब,इस ग़ज़ल में भी वही क़वाफ़ी आये हैं जो पिछली ग़ज़ल में भी थे ।
ये ग़ज़ल किसलिये हुई,ये कहानी भी सुन लीजिये,यहाँ मेरे एक शाइर दोस्त हैं उन्होंने इस जमीन में ग़ज़ल कहकर मुझसे फ़रमाइश कि के मैं भी इसमें ग़ज़ल कहूँ, उनकी ग़ज़ल आठ अशआर पर मबनी थी,और सामने के सभी क़ाफिये वो इस्तेमाल कर चुके थे,जैसे 'मज़ीद, ईद, दीद, हमीद,वग़ैरा मेरे लिए उनकी फ़रमाइश पूरी करना एक चैलेन्ज बन गया और मैंने ये ग़ज़ल उन्हें सुनाई और उनसे कहा कि मैंने आपके किसी भी क़ाफिये को छुए बग़ैर अपनी ग़ज़ल कही है,उन्होंने भी कहा कि ये ज़मीन वैसे भी दुश्वार थी आपने अपने तईं इसे और दुश्वार कर लिया और बहतरीन ग़ज़ल कही, ये ग़ज़ल जब मेरे एक शागिर्द सुभाष सोनी ने सुनी तो उन्होंने 27 साल पहले कहा हुआ मेरा एक मतला सुनाया :-
'ये काम आज के अह्ल-ए-जदीद करते हैं
ग़ज़ल के मुंह पे तमांचा रसीद करते हैं'
और सोनी जी ने फ़रमाइश करके वो ग़ज़ल मुझसे कहलवाई जो पटल पर पहले आ गई ।
ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Mahendra Kumar on July 20, 2017 at 9:22pm

इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर
अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो ...वाह! कितनी ख़ूबसूरती से आपने प्रचलित मुहावरे को शेर में तब्दील किया है. शानदार!! काफ़िये मेरे लिए बिलकुल नए थे. बहुत कुछ सीखने को मिला. इस उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाई स्वीकार कीजिए आ. समर कबीर सर. सादर.

Comment by Ravi Shukla on July 17, 2017 at 7:56pm

आदरणीय समर साहब आदाब फिर से एक बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल पढ़ने को मिली मुबारकबाद पेश करते हैं इसके लिए ।कुछ ऐसी ग़ज़ल कुछ दिन पहले आपने कही थी इन्ही कवाफ़ी के साथ उस पर हुई चर्चाओं से हमे लगा कि यह ग़ज़ल आई है। अशआर में अपनी बात कहने का आपका अंदाज बहुत ही निराला है एक बार फिर से इस ग़ज़ल के अशआर पर दिली मुबारकबाद पेश करते हैं सादर

Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 6:37pm
जनाब सौरभ पाण्डेय साहिब आदाब,बहुत दिनों बाद आपकी प्रतिक्रया पाकर बेहद ख़ुशी हुई,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service