For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरा कच्चा मकान क्या करता (ग़ज़ल 'राज')

२१२२  १२१२    २२

बात खाली मकान क्या करता

दास्ताँ वो बयान क्या करता 

 

पंख कमजोर हो गये मेरे  

लेके अब  आसमान क्या करता 

उसकी  सीरत ने छीन ली सूरत

उसपे सिंघारदान क्या करता 

 

रूठ जाते मेरे सभी अपने

चढ़के ऊँचे मचान क्या करता

 

नींव में झूठ की लगी दीमक 

लेके ऐसी दुकान क्या करता

 

बाढ़ में ढह गये महल कितने    

मेरा कच्चा मकान क्या करता

 

मौन सब थे निजाम की सुनकर

मैं चलाकर  जुबान क्या करता

 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

 

Views: 261

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rajeev Sharma "Raj" on September 6, 2017 at 11:28am

बाढ़ में ढह गये महल कितने    

मेरा कच्चा मकान क्या करता

बहुत खूब जी , लाज़वाब 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 14, 2017 at 8:48am

बहुत बहुत शुक्रिया आद० आशीष श्रीवास्तव जी 

Comment by Ashish shrivastava on August 13, 2017 at 10:06pm
बेहतरीन ग़ज़ल है , आदरणीया ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 1, 2017 at 6:27pm

आदरणीय सी एम उपाध्याय जी आपको ग़ज़ल पसंद आई बहुत बहुत आभार शुक्रिया |

Comment by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 1, 2017 at 2:03pm

आदरणीया  rajesh kumari जी ,
वाह वाह ! क्या खूब ग़ज़ल कही है !! मेरी दिली बधाई स्वीकार करें | 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 29, 2017 at 12:15pm

आद० विजय निकोर जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से बहुत आभारी हूँ |

Comment by vijay nikore on July 24, 2017 at 11:34am

बहुत ही खूबसूरत गज़ल कही है, आदरणीया राजेश जी। हार्दिक बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 16, 2017 at 7:37pm

आदरणीय योगराज जी ,मेरी इस ग़ज़ल को फीचर करने के लिए कोटि कोटि आभार |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 16, 2017 at 7:34pm

आद० हरि प्रकाश दूबे जी ,आपका बहुत बहुत आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 16, 2017 at 7:32pm

मोहतरम जनाब तस्दीक अहमद जी ,आपका बहुत बहुत शुक्रिया 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rakshita Singh commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post अंजामे दिल/ग़ज़ल
"आदरणीय नीरज जी बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ...  मैं भला हूँ किस तरह तुझसे अलग, मुझमें जो कुछ भी है…"
34 minutes ago
Mohammed Arif posted a blog post

कविता --पारदर्शिता

कितनी पारदर्शिता हैइस सदी मेंकिसानों की बर्बाद फसल कातगड़ा मुआवज़ा देने कीसरकार खुलेआम घोषणा कर रही…See More
4 hours ago
Mohammed Arif commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post गीतिका
"आदरणीय नंदकीशोर दुबे जी आदाब,                    …"
4 hours ago
Mohammed Arif commented on रामबली गुप्ता's blog post गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता
"आदरणीय राम बली गुप्ता जी आदाब,                  …"
4 hours ago
Neeraj Mishra "प्रेम" posted a blog post

अंजामे दिल/ग़ज़ल

महफिलों से एक दिन जाना ही है । आख़िरश अंजामे दिल तनहा ही है ।क्या हुआ जो आज मै तड़पा बहुत, मुद्दतों…See More
5 hours ago
vijay nikore posted a blog post

काल कोठरी

काल कोठरीनिस्तब्धताअँधेरे का फैलावदिशा से दिशा है काला आकाशरात है मानो अँधेरे कीएक बहुत बड़ी…See More
5 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

बात दिल मे ही ठहर जाती है

2122 1122 22छू के साहिल को लहर जाती है ।रेत नम अश्क़ से कर जाती है ।।सोचता हूँ कि बयाँ कर दूं कुछ…See More
5 hours ago
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post इश्क कुछ इस तरह निबाह करो/ ग़ज़ल
"आदरणीय राम अवध जी बहुमूल्य जानकारी देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।"
10 hours ago
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post इश्क कुछ इस तरह निबाह करो/ ग़ज़ल
"बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब"
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post गीतिका
"बहुत सुंदर। हार्दिक बधाई आदरणीय नंदकिशोर दुबे जी।"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत रोचक और सुंदर। हार्दिक बधाई आदरणीय  शरद सिंह ' विनोद' जी।"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी।"
12 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service