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फ़ितरत(लघुकथा)राहिला

भोर की चाय और छत का वह कोना जहाँ से गुलमोहर के फूलों से लदे पेड़ दूर तक दिखाई देते थे।ये उसकी रोज की बैठक थी।एक हाथ में चाय की ट्रे और दानों की कटोरी, दूसरे हाथ में पानी का जग ।वह अपने साथ अपनी सखियों को कभी नहीं भूलती।तभी एक बड़े रौबीले ,सजीले सुते हुए पंखों वाले चिड़वे ने उसका ध्यान आकर्षित किया ।वह बड़े ही मोहक अंदाज़ में चिड़ियों के आगे पीछे चक्कर लगा रहा था।वहीं चिड़ियां भी इठला रही थीं।उज़मा को ये सब देख कर मज़ा आने लगा।
रासलीला जारी थी कि अचानक चिड़वे ने अपने ऊंचे उठे पंखों को नीचे की ओर गिरा दिया ।चाल भी रौबीली से खुशामत वाली सी हो गयी। माज़रा तब समझ आया जब उसने चोंच से दाने उठा कर हाल ही में उड़ कर आई चिड़िया के आगे रखना शुरू कर दिए ।लेकिन ये क्या? चिड़िया थी कि टोंके पर टोंके मारे जा रही थी।ऐसा लगा शायद दूर से उसने अपने चिड़वे को रंगरलियां मनाते देख लिया था। वह उन दोनों का तमाशा देख कर अपनी हंसी नहीं रोक पाई।तभी चिड़िया फुर्र हो गयी और चिड़वा उसके जाते ही फिर से पुराने डीलडोल में आ गया ।ये देखकर वह जोर से हंस पड़ी कि अचानक उसकी निगाह बगल वाले फ्लैट की बालकनी में एक मुस्कुराती हुई खूबसूरत सी नाजुक बाला पर पड़ी।इतना तो उसे यकीन हो गया कि वह उसे देख कर तो नहीं मुस्कुरा रही थी अपितु उस लड़की की बालकनी के सामने उसकी बालकनी जरूर थी।जहाँ इस समय पतिदेव अखबार लिए बैठते हैं।
"ये मर्द भी ना सब एक से होते हैं।" उसने गुस्से से चिड़वे की तरफ देखा फिर पैर पटकती हुई बालकनी कि ओर बढ़ गयी।

मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by Ravi Prabhakar on June 18, 2017 at 12:41pm

विवरणात्‍मक शैली में लिखी ये लघुकथा आपके लेखकीय कौशल का एक और नमूना है। लघुकथा के पठन के दौरान पाठक स्‍वयं छत पर पहुंच जाता है और चिड़यों की चहचहाट महसूस करता है, यह इस लघुकथा के दृश्‍य चित्रण का बेहतरीन सम्‍प्रेषण है। प्रैजेंटेशन इस लघुकथा का वैशिष्‍टय है जिस हेतु आपको हार्दिक शुभकामनाएं । पर इस कथा का उद्देश्‍य मेरी समझ के परे है कि इस लघुकथा के माध्‍यम से आप कहना क्‍या चाह रही हो? बहरहाल इस लघुकथा के लिए बधाई स्‍वीकारें ।

Comment by Mahendra Kumar on June 10, 2017 at 4:49pm

आ. राहिला जी, पुरुष मानसिकता को एक स्त्री के दृष्टिकोण से आपने अपनी इस लघुकथा में अच्छे से उभारा है. यदि दो-एक संवाद और हो जाएँ तो मज़ा कुछ और बढ़ जाएगा. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

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