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(1) इबादत ,भक्ति और संवाद है माँ,
कोमल,निश्छल और निर्विवाद है माँ,
दुखों की गठरी कांधों पे ढोहती,
ममता की वर्षा से आबाद है माँ ।
(2)रोशनी, दीपक कभी राहत है माँ,
घरेलू नुस्खा कभी हिक़मत है माँ,
लय,छंद,गति,पाठ कभी शब्द साग़र,
संबल-सहारा कभी चाहत है माँ ।
(3)शीतल छाया कभी सहूलत है माँ,
आँसू ,सिसकी कभी हिदायत है माँ,
पंचतंत्र, जातक कथाओं-सी सीख,
घरेलू झगड़ों की अदालत है माँ ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by Sushil Sarna on June 7, 2017 at 4:19pm

वाह आदरणीय मो. आरिफ साहिब  .... माँ को समर्पित आपके भावों की मार्मिक अभिव्यक्ति के लिए आपको तहे दिल से मुबारक।  माँ से बढ़कर कुछ नहीं  ... माँ है तो जहां है वरना मैं जी सकूं ऐसी किसी की ओकात कहाँ है। 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 7, 2017 at 3:40pm

पंचतंत्र, जातक कथाओं-सी सीख,
घरेलू झगड़ों की अदालत है माँ । बहुत ख़ूबसूरत , वाह आदरणीय आरिफ साहब बधाई आपको 

Comment by Ravi Shukla on June 7, 2017 at 2:12pm

वाह वाह आदरणीय आरिफ साहब बहुत सुन्‍दर मुक्‍तक कहे है आपने दिली बधाई पेश है

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