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"तरही ग़ज़ल , जनाब रवि शुक्ल साहिब की नज़्र"

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुन

पहले अपनी रूह का ये मक़बरा रोशन करें
और इसके बाद हम सोचें कि क्या रोशन करें

गर मयस्सर घी नहीं है,तेल का रोशन करें
मन्दिर-ओ-मस्जिद में जाएँ इक दिया रोशन करें

ये हमारी ज़िम्मेदारी है, हमारा फ़र्ज़ भी
नाम अपने बाप दादा का सदा रोशन करें

नफरतों के इन अँधेरों को मिटाने के लिये
हम चराग़ उल्फ़त के यारो जा ब जा रोशन करें

याद कर के नज़्म 'हाली'की,ज़ईफ़ा की तरह
झुटपुटे के वक़्त मिट्टी का दिया रोशन करें

आम कर दीजे 'ज़फ़र' साहिब के इस पैग़ाम को
"इक दिया जब साथ छोड़े, दूसरा रोशन करें

--समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on May 22, 2017 at 11:33am
प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,सबसे पहले तो मुआफ़ी चाहता हूँ कि किन्हीं उलझनों के कारण आपके सन्देश का जवाब नहीं दे सका,शायद आपने अपने संदेश में इसी ग़ज़ल का ज़िक्र किया है ।
ग़ज़ल आपको पसंद आई लिखना सार्थक हुआ,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
आपके माध्यम से मंच को बताना चाहता हूँ कि रमज़ान का महीना 27 मई से शुरू होने जा रहा है,इस कारण 25-5-2017 से में मंच से एक महीने तक ग़ैर हाज़िर रहूँगा,इसके लिये जनाब प्रधान संपादक महोदय से भी आज रज़ा लूंगा ।
Comment by vijay nikore on May 20, 2017 at 12:50am

//पहले अपनी रूह का ये मक़बरा रोशन करें
और इसके बाद हम सोचें कि क्या रोशन करें//

अज़ीज़ समर भाई, पढ़ कर खुश हूँ और हैरान भी हूँ, कि इस एक ही शेर में आपने कैसे spirituality की सबसे बड़ी और अच्छी मिसाल दे दी। दिल से दाद देता हूँ, और शुक्रिया कि यह गज़ल पढ़ने को मिली।

Comment by Samar kabeer on May 15, 2017 at 5:42pm
जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Mahendra Kumar on May 15, 2017 at 12:12pm

पहले अपनी रूह का ये मक़बरा रोशन करें
और इसके बाद हम सोचें कि क्या रोशन करें ...वाह! वाह!! क्या ख़ूब मतला है आदरणीय समर कबीर सर. इस रोशन ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए. सादर. 

Comment by Samar kabeer on May 12, 2017 at 6:14pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका शुजरगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on May 12, 2017 at 6:13pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,आपसे गुज़ारिश हे कि ग़ज़ल तवज्जो से पढ़ा करें ।
सुख़न नवाज़ी के लिये आपका शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on May 12, 2017 at 6:10pm
जनाब रवि शुक्ला जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on May 12, 2017 at 6:08pm
मोहतरमा कल्पना भट्ट साहिबा आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on May 12, 2017 at 6:07pm
जनाब नरेन्द्रसिंह चौहान साहिब आदाब,सूझन नवाज़ी के लिये आपका शुक्रञ्जर हूँ ।
Comment by Samar kabeer on May 12, 2017 at 6:04pm
जनाब राघव प्रियदर्शी साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका शुक्रगुज़ार हूँ ।

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