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तू गीत कोई "मल्हार"सा गा दे

जो मुझको तेरा मीत बना दे,

मुखड़े पर स्वर-संगीत उठा कर

स्थाई पर जैसे सम आकर,

तू गीत कोई "मल्हार" सा गा दे

कुछ एक नयी सी रीत बना दे,

फिर एक नई बंदिश तू लिख दे

जो दिल आकर घर सा कर दे,

मुझको अपनी मीत बना दे

मुझको अपनी जीत बता दे,

तू कुछ ऐसा गीत बना दे

जो तेरी मेरी प्रीत बता दे,

तू गीत कोई "मल्हार"सा गा दे

जो मुझको तेरा मीत बना दे,

तू गीत कोई "मल्हार"सा गा दे

जो तेरा मेरा साथ बता दे,

जो तेरा मेरा साथ बता दे......

                              "मल्हार"

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Rohit dobriyal"मल्हार" on April 21, 2017 at 7:39pm

आभार शिज्जु "शकूर" भाई जी...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 21, 2017 at 4:50pm

अच्छा प्रयास है आ. रोहित भाई 

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