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ग़ज़ल नूर की-- तेरी दुनिया में हम बेकार आये.

.
समझ पाये जो ख़ुद के पार आये,
तेरी दुनिया में हम बेकार आये.
.
बहन माँ बाप बीवी दोस्त बच्चे,
कहानी थी.... कई क़िरदार आये. 
.
क़दम रखते ही दीवारें उठी थीं,  
सफ़र में मरहले दुश्वार आये.
.
शिकस्ता दिल बिख़र जायेगा मेरा,
वहाँ से अब अगर इनकार आये.
.
उडाये थे कई क़ासिद कबूतर,   
मगर वापस फ़क़त दो चार आये.
.
समुन्दर की अनाएँ गर्क़ कर दूँ,
मेरे हाथों में गर पतवार आये.
.
अगरचे लोग वो सस्ते नहीं थे,
जो बिकने को सर-ए-बाज़ार आये.
.
तेरी यादों से छुट्टी कब मिलेगी,
कभी तो ज़ह’न को इतवार आये. 
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on March 27, 2017 at 2:24pm

शुक्रिया आ. नीलम जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on March 27, 2017 at 2:23pm

शुक्रिया आ. आमोद जी 

Comment by Mohammed Arif on March 27, 2017 at 2:15pm
बहन माँ बाप बीवी दोस्त बच्चे
कहानी थी....कई क़िरदार आये । वाह वाह वाह क्या शेर है । बधाई आदरणीय नीलेश जी ।
Comment by Neelam Upadhyaya on March 27, 2017 at 12:15pm

आदरणीय नूर साहब, बहुत ही सुन्दर गजल के लिए बधाई ।

 

Comment by amod shrivastav (bindouri) on March 27, 2017 at 10:53am
आ बहुत ही सुन्दर चित्रण आप को कोटि कोटि बधाई नमन
Comment by Nilesh Shevgaonkar on March 27, 2017 at 7:30am

शुक्रिया आ. बैजनाथ शर्मा जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on March 27, 2017 at 7:29am

शुक्रिया आ. मोहित जी 

Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on March 27, 2017 at 12:30am

आदरणीय नूर साहेब.......बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है ....बहुत बहुत बधाई आपको 

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