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इक तेरे तसव्वुर ने महबूब यूं संवार दी ज़िन्दगी

कि तेरे बगैर भी हमने हँस कर गुजार दी ज़िन्दगी

राहें -मुहब्बत में दर्दो -ग़म देने वाले बेदाद सुन

तेरी इस सौगात के बदले हमने निसार दी ज़िन्दगी

तमाम उम्र यूं रखा हमने अपनी साँसों का हिसाब

जैसे किसी सरफ़िरे ने ब्याज़ पर उधार दी ज़िन्दगी

बात मुक़दर की जब आये शिकवा -गिला बेमानी है

जिसने तुझे गुल बनाया उसी ने मुझे ख़ार दी ज़िन्दगी

तूं ही बता ऐ ख़ुदा उसकी आतिश -अफ़सानी कैसे बुझे

चाह-ऐ-सुकूं में जिस शख्स को तूने अंगार दी ज़िन्दगी

हर इक ग़म को बड़े करीने से हँसी में छुपा लिया हमने

ऐ ख़ुदा तेरा शुक्रिया ,क्या खूब हमें फनकार दी ज़िन्दगी

किनारों की खफगियों से इस दर्ज़ा शिकस्त हुआ दिल

आख़िरकार "आशा " ने गिर्दाब में उतार ली ज़िन्दगी

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Comment

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Comment by vijay nikore on March 6, 2013 at 2:34pm

आदरणीया आशा जी:

 

हर इक ग़म को बड़े करीने से हँसी में छुपा लिया हमने
ऐ ख़ुदा तेरा शुक्रिया ,क्या खूब हमें फनकार दी ज़िन्दगी

 

इस बेहद खूबसूरत और दिलकश गज़ल के लिए बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by anupama shrivastava[anu shri] on January 14, 2011 at 1:03pm
तमाम उम्र यूं रखा हमने अपनी साँसों का हिसाब

जैसे किसी सरफ़िरे ने ब्याज़ पर उधार दी ज़िन्दगी
bahut khoob................asha ji.
Comment by jagdishtapish on August 7, 2010 at 7:47pm
माननीय आशा जी
तमाम उम्र हमने रखा अपनी सांसों का यूँ हिसाब --
जैसे किसी सरफिरे ने ब्याज पर दी उधार ज़िन्दगी |
वैसे तो ज़िन्दगी पर बहुत कुछ कहा सुना जाता रहा है
लेकिन आपने अपने एक अलग से ही अंदाज में ज़िन्दगी और सांसों
के बीच के रिश्ते को ब्याज से जोड़कर परिभाषित किया बहुत अच्छी रचना
ह्रदय से धन्यवाद आपको --सादर
Comment by asha pandey ojha on July 18, 2010 at 1:49pm
@ Baban bhaiya @ Ganesh ji bhaiya @ Miraz bhiya @ satish Ji Bhiya W mere parm aadrniy Bhaisaahb Yograaj ji saahb aap sabhee ka sneh mere liye duniya kee sabse kimtee doulat hai .. aap sabhee ne mujhe padha w daad dee uske liye aap sabhee ke prti dil kee ghrai se aabharee hun ..bahut bahut ,shukriya ..aabhar
Comment by asha pandey ojha on July 18, 2010 at 1:45pm
main O B O ke tamam bhaiyon w bahno se haathjod kar mafee mangtee hun ki mera G mail kaam n kar pane kee wazh se main bahut dino se mere pariwaar ke sadsyon se milne se wanchit rahee aaj kam se kam do ghante tak koshish karne par G mail khula tab main punh aap logon ke beech hazir hui hun ..umeed hai aap sab log mujhe maaf karenge

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 10, 2010 at 10:31pm
Bahut badhiya gazal likhi hai aasha didi, aaj kal aap ka aana nahi ho raha hai OBO par kyaa baat hai, aap thik hai na ?

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 28, 2010 at 12:16pm
मोतियों की तरह पिरो पिरो कर शेयर कहे हैं आपने आशा जी , गज़ल पढ़ कर आनंद आया ! मतला और मक़ता दोनों ही निहायत खूबसूरत हैं ! यूँ तो हर शेअर आला मयारी है मगर ये दो शेअर दिल में उतर गए :

//तमाम उम्र यूं रखा हमने अपनी साँसों का हिसाब
जैसे किसी सरफ़िरे ने ब्याज़ पर उधार दी ज़िन्दगी//
//हर इक ग़म को बड़े करीने से हँसी में छुपा लिया हमने
ऐ ख़ुदा तेरा शुक्रिया ,क्या खूब हमें फनकार दी ज़िन्दगी//

इस उम्दा गज़ल के लिए आपको दिल से बधाई देता हूँ !
Comment by satish mapatpuri on June 28, 2010 at 11:50am
राहें -मुहब्बत में दर्दो -ग़म देने वाले बेदाद सुन

तेरी इस सौगात के बदले हमने निसार दी ज़िन्दगी

तमाम उम्र यूं रखा हमने अपनी साँसों का हिसाब

जैसे किसी सरफ़िरे ने ब्याज़ पर उधार दी ज़िन्दगी

बात मुक़दर की जब आये शिकवा -गिला बेमानी है

जिसने तुझे गुल बनाया उसी ने मुझे ख़ार दी ज़िन्दगी
फ़क़त मैं आपको दाद ही दे सकता हूँ , लाजबाब आशा जी.
Comment by baban pandey on June 27, 2010 at 11:12pm
तमाम उम्र यूं रखा हमने अपनी साँसों का हिसाब

जैसे किसी सरफ़िरे ने ब्याज़ पर उधार दी ज़िन्दगी......lajawaw...asha ji.

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