For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दोहा- ग़ज़ल (जिसकी जितनी चाह है, वो उतना गमगीन (गिरिराज भंडारी )

22  22  22  22  22   22

बात सही है आज भी , यूँ तो है प्राचीन
जिसकी जितनी चाह है , वो उतना गमगीन

फर्क मुझे दिखता नहीं, हो सीता-लवलीन

खून सभी के लाल हैं औ आँसू नमकीन

क्या उनसे रिश्ता रखें, क्या हो उनसे बात

कहो हक़ीकत तो जिन्हें, लगती हो तौहीन   

सर पर चढ़ बैठे सभी , पा कर सर पे हाथ

जो बिकते थे हाट में , दो पैसे के तीन

 

बीमारी आतंक की , रही सदा गंभीर

मगर विभीषण देश के , करें और संगीन

 

कुछ तो सचमुच भैंस हैं , बाक़ी भैंस समान

कोई ये समझाये अब , कहाँ बजायें बीन

 

घर की सारी झंझटें , हो जायेंगी साफ

पिछले हों संस्कार सब , सुविधा अर्वाचीन

********************************** 

मौलिक एवँ अप्रकाशित

Views: 2781

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 9, 2016 at 5:53pm

आदरणीय गिरिराज सर, बहुत ही शानदार प्रस्तुति हुई है. हार्दिक बधाई. दोहा आधारित ग़ज़ल का स्वरुप मुग्ध कर रहा है लेकिन फिर भी इसे अरूज़ के हिसाब से ग़ज़ल कहा जा सकता है ? क्योकि सबसे बड़ी समस्या ग्यारहवीं मात्रा का लघु होना है. उसकी द्विकल पूर्ती के लिए कहीं भी अवसर नहीं है. मात्रिक बह्र की ये अनिवार्य शर्त है. कोरम पूरा हो तभी सदन चलता है. लेकिन हाँ यदि फेलुन फेलुन फ़ाइलुन, फेलुन फेलुन फ़ा / फेलुन फेलुन फ़ाइलुन, फेलुन फेलुन फेल कोई मान्य बह्र है तो इसे ग़ज़ल कहा जा सकता है. मैंने भी छंदोत्सव के लिए दोहा ग़ज़ल का प्रयास किया था लेकिन ग्यारहवीं मात्रा की समस्या से निजात ही नहीं थी तो उस प्रयास को रहने दिया और दोहा आधारित गीत तक ही सीमित रहा. बहरहाल मंच पर एक नवाचार की शुरुआत के लिए बहुत बहुत बधाई. सादर 

Comment by Anuj on June 9, 2016 at 5:50pm

आदरणीय गिरिराज जी,

आप छठे शेर के दूसरे मिसरे को 'कोई ये समझाये अब , कहाँ बजायें बीन' की जगह अगर  'कोई अब समझाये ये, कहाँ बजायें बिन' और सातवें शेर के दूसरे मिसरे 'पिछले हों संस्कार सब , सुविधा अर्वाचीन' की जगह अगर 'पिछले सब संस्कार हों , सुविधा अर्वाचीन' कर लें तो आपकी पूरी ग़ज़ल 'फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फा' (22 22 22 22 22 2) के वजन पर अरूजी एतबार से भी जायज होगी और मात्रिक छंद के एतबार से भी. आखिरी लघु चुकि साकिन होता है अतः वो तक्ती में शुमार नहीं होता. एक और अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाईयां !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 9, 2016 at 5:22pm

आदरनीय रवि भाई , उत्साहवर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार । बाक़ी चर्चा तो ज़ारी है , जो भी तय हो , मंज़ूर है ।

Comment by Ravi Shukla on June 9, 2016 at 5:15pm

आदरणीय गिरिराज जी आपकी दोहा गजल का पहले तो आंनद लिया है ।

 अब इसके शिल्‍प पर होने वाली चर्चा से भी कुछ सीख समझ रहे है वैसे हम इसे 22  22  22  22  22   22 बहर के रूप मे ही ले रहे है अब पढने में ये दोहा छंद के अनुसार लगतही है तो क्‍या बुरा है उस लय मे पढ लीजिये ये जरूरी तो नहीे इसे दोहा गजल कह के दोहा के शब्‍द कल और मात्रा केे अनुसार ही बदला जाए । इस बहर में 121 या 12 12 को प्रवाह के अनुसार 22 या 22 माना ही जाता है । बाकी अरूज जो कहता है वो जानने के लिए गुणी जनों की राय पढ़ने के लिये लौट कर फिर आते है ।  बहुत बहुत बधाई आपको । सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 9, 2016 at 4:34pm

आदरणीय सौरभ भाई आपकी बात सही है  , फेलुन फेलुन फ़ाइलुन, फेलुन फेलुन फेल  22    22  212  22  22  21   , लेकिन बह्र लिख्ते समय अंतिम 1 को छोड देना पड़ेगा -- 22    22  212  22  22  2 ही किखा जायेगा ऐसा लिख्ने से कुल मात्रा 23 हो रही है और दूसरी बात  -- एक उदाहरण -- किसी किसी ने ये कहा , और किसी ने वो  , अगर प्रथम पंक्ति का विन्यास ऐसा हो तो -- मात्रा विन्यास  --- 1212   22  12  , 2112  22  हो जायेगा  क्यों कि दोहों के कई विन्यास सही होते हैं । अतः मुझे .....  
22   22   22  22  22  22  बह्र लिखना सही लगता है , इसमे   22  को  112   121  211  करने की छूट भी है , आप बतायें क्या सही होगा ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 9, 2016 at 3:52pm

हम फेलुन फेलुन ... फ़ा के होने पर नहीं आपके निर्वहन पर संकेत दे रहे थे, आदरणीय गिरिराज भाई. दोहे की एक पंक्ति में ग्यारहवीं और चौबीसवीं मात्रा अवश्य ही लघु होती है. लेकिन इसे फेलुन फेलुन... के हिसाब से कैसे साधा जाय, समस्या यहाँ है.

इसी कारण इसे फेलुन फेलुन फ़ाइलुन, फेलुन फेलुन फेल  (२२ २२ २१२, २२ २२ २१)  के अनुसार निबद्ध कीजिये. सम, विषम हर तरह के शब्द मात्रिक बहर की तरह सहज निभ जायेंगे. 

देखियेगा.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 9, 2016 at 2:12pm

आदरणीय सौरभ भाई , आपकी मुखर सरहना से दिल बाग बाग हुआ जा रहा है , आपका हृदय से आभार ।

चूँकि ये गज़ल रूप मे है और बह्र में अंतिम एक मात्रा लिखने की मनाही है  इस लिये उस एक मात्रा को हटा देने के बाद  कैसा बह्र का क्या रूप होगा तय नही कर पाया , इसी लिये  दोहे के 24 मात्रा को 6 फेलुन करना ही उचित लगा , बाक़ी गुणिजन जैसा कहें , स्वीकार है ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 9, 2016 at 1:59pm

आपकी सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों में से एक इस प्रस्तुति पर मुखर बधाइयाँ स्वीकारें आदरणीय गिरिराज भाई जी. हर शेर सटीक और तीखा है. जो इस तरह की कहन की आवश्यकता हुआ करती है.

वैसे, मिसरे का वज़न फेलुन फेलुन .. फ़ा  बताया है आपने, लेकिन अरुज़िया निग़ाह से तनिक लोचा है .. :-))

मैं इस विन्दु पर सुधीजनों के कहे की प्रतीक्षा करूँगा. 

बहरहाल आपकी इस ग़ज़ल पर पुनः चला.. हा हा हा...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 9, 2016 at 1:35pm

आ. सूर्या बाली भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया आपका ।

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 9, 2016 at 12:28pm

आदरणीय भण्डारी साहब बहुत खूबसूरत दोहे ! क्या सच्ची बयानी की है आपने। बहुत बहुत मुबारकबाद 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Friday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Friday
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service