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हर जगह
छलांग नहीं लगाया जा सकता ॥

मंजिल तक
पहुचने के लिए
सीढियों की ज़रूरत
तो पड़ती ही है ॥

इन सीढियों को
हम जितनी
मेहनत /श्रम /लगन से बनायेगें ....

ये सीढिया ...
उतनी जल्दी ही
हमें अपनी मंजिल तक
पंहुचा देगी ॥
----------बबन पाण्डेय

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Comment

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Comment by baban pandey on June 21, 2010 at 6:06am
Babita GUPTA Ji aur Julie JI ......aaplogo ka aabhari hu .
Comment by Babita Gupta on June 20, 2010 at 1:44pm
achhi kavita hai, realy good, Thanks for this creation,

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 20, 2010 at 11:15am
बहुत सुंदर बात कही है बब्बन भइया, मंज़िल पाने के लिये या किसी भी प्रकार की सफलता के लिये माध्यम की ज़रूरत तो पड़ती ही है, ये सीढ़िया भी तो एक माध्यम ही है मंज़िल तक पहुचने का, बहुत बढ़िया , अच्छी रचना ,

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