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कौन कहता है ........मै इन्सान नहीं हूँ ,
हरकतें तो वही हैं ,मतलब भगवान नहीं हूँ ॥

मन में सब दुनियावी इच्छओं का ढेर लगा है ,
सब है फिर भी मुझको भी, ९९ का फेर लगा है ॥

मन की सारी चिंताएं बिलकुल, सबके जैसी हैं ,
मेरी हैं सबसे अलग, तुम्हारी बताना कैसी है ॥

हम तो सबका भला मांगते, ऐसा मन कहता है ,
पर हमेशा अपने भले की ,दुआ ये मन करता है ॥

हूँ इन्सान पर कहता हूँ'' मै बेईमान नही हूँ '',
अगर यह सच है, तो लगता है ''इन्सान नही हूँ ॥

सारी खूबियाँ जब मुझमे है ,तो इसमें क्या है शक ॥?
''कमलेश'' भजो भगवान को , इन्सान बनने तक ॥

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Comment by कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा on June 24, 2010 at 9:11pm
AAP SABHI.BAGI JI .BABITA JI AUR JULIE JI KO MERA SHUKRIYA ..

.BNAYE RAKHEN HAMESHA YEHI JAZBA''KAMLESH'' KE LIYE..!!

JALATE RAHEN GHANE ANDHERE RASTON ME UJALON KE DIYE..... !!
Comment by Babita Gupta on June 20, 2010 at 2:16pm
सारी खूबियाँ जब मुझमे है ,तो इसमें क्या है शक ॥?
''कमलेश'' भजो भगवान को , इन्सान बनने तक ॥
Bahut badhiya kaha sir , achha likha hai aapney , sunder rachna hai, kabhi kabhi aisi rachna padhney ko milti hai, Thanks,
Comment by Admin on June 19, 2010 at 9:26pm
हूँ इन्सान पर कहता हूँ'' मै बेईमान नही हूँ '',
अगर यह सच है, तो लगता है ''इन्सान नही हूँ ॥

बहुत खूब कहा है कमलेश भाई, शानदार , कोई अब मानने को तैयार नहीं है की ये इन्सान ईमानदार भी हो सकता है, इन्सान नामक जंतु से इमानदारी नाम का गुण ख़तम होते जा रहा है,

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