For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हर तरफ आखिर हँसी छा गयी है
आज कौवे को चिड़ी भा गयी है।

काँव कितनी बार करता रहा वह,
ठाँव उसके आज मैना गयी है।

टक लगा बगुला रहा था कभी से,
चोंच मछली एक छलक आ गयी है।

देख वंशी है लगी हो कहीं कुछ,
लोग बोलें टोना' ले जा गयी है।

साँढ़ बूढ़ा कुलबुलाया शहर में,
देख बछिया खुद अचंभा गयी है।

विश्व-जय सी हो गयी तो अभी है
कंत-घर अमृत नवोढ़ा गयी है।

बाग़ में बुलबुल अभी गा रही थी,
क्यूँ न जाने चुप हवा छा गयी है।

"मौलिक व अप्रकाशित"@मनन
(2122 2122 122)
'=मात्रा पतन

Views: 456

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manan Kumar singh on September 8, 2015 at 10:46pm
आदरणीय करुण जी,रचना में इतनी गहरी पैठ आपके आशीर्वाद को द्योतित करती है और साथ ही शायद संवेदना की व्यापकता को भी।वैसे सवेदनाएं लौकिकता के आईने में झाँकती तो हैं ही,सादर।
Comment by Santlal Karun on September 8, 2015 at 6:45pm

आ. मनन कुमार जी,

आप ने अच्छी हिन्दी ग़ज़ल कही है, हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ स्वीकारें | पर लगता है इस ग़ज़ल की अभिव्यंजना में राष्ट्रीय समाचारों में चर्चित कौवे-मैना की ताज़ा घटना निहित है | हो सकता है यह रचना की संवेदना की व्यापकता हो या संयोग या मेरा भ्रम ...यह तो आप ही स्पष्ट कर सकते हैं | खैर .. पुन: साधुवाद !

Comment by Manan Kumar singh on September 7, 2015 at 10:28pm
आदरणीय रवि जी, प्रयास रहता है,सादर।
Comment by Ravi Shukla on September 7, 2015 at 2:46pm

आदरणीय मनन जी , बधाई शिल्‍प पर आपका अभ्‍यास अच्‍छा है ।

Comment by Manan Kumar singh on September 7, 2015 at 10:19am
टोना=मछली पकड़ने में वंशी में फँसाया गया खाद्य पदार्थ

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
2 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
8 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
17 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Feb 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 6
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Feb 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service