For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गोलियों के बाद

खौफ् कॆ बारुद्
फिज़ा मॆं उड गयॆ
नक़ाब् के चह्ररॆ
श्हर् मॆं मिल् गयॆ
गॊलियॊ कि अवाज़्
कुछ् ऐसॆ बिखर् गयी
दॆखते ही देखते धर्रती
कि सुरत् बदल् गयी
कि कॊइ रॊता भी नही
कॊइ मुस्कुरता भी नही
कॊइ सॊता भी नही
कॊइ जागता भी नही
कॊइ चलता भी नहीं
कॊइ रुक्तता भी नही
कॊइ हारता भी नही
कॊइ हराता भी नही
कॊइ सहमता भी नही
कॊइ शर्रमाता भी नही
कॊइ खॊता भी नही
कॊइ पाता भी नही
कॊई आता भी नही
कॊई जाता भी नही
मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 545

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by S.S Dipu on July 31, 2015 at 12:48am
Comment by Deepu mundrawal just now
Delete Comment
Samar ji आपका सुझाव अनमोल है।आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।
मैं बताना चाहती हूँ कि मैंने जबसे लिखना का प्रयास किया उन्हीं रचनाओं को पहले पोस्ट करना चाहती हूँ। जी मैं आइन्दा से हिंदी का प्रयोग करूँगी
धन्यवाद
Comment by Samar kabeer on July 30, 2015 at 11:51pm
your thinking is nice,but my sujjetion is please join obo ghazal classes,please post your comments in hindi .
Comment by S.S Dipu on July 29, 2015 at 10:02pm
thanks a lot for your suggestion and guidance.i appreciate it sir.respected मिथिलेश वामनकर ji all that I am posting is from the diary which was written with tender fingers . I didn't make any changes in that. I will post something very new very soon. Again thanks sir
Comment by S.S Dipu on July 29, 2015 at 9:55pm
Thanks a lot Sushil sarna ji. I am here to learn so much from you all.
Comment by Sushil Sarna on July 29, 2015 at 8:50pm

आदरणीया  , भाव सुंदर हैं लेकिन क्षमा सहित भाषा में त्रुटियाँ प्रवाह में बाधक हैं   … आदरणीय मिथिलेश जी की टिप्पणी पर मैं सहमत हूँ। प्रस्तुति पर बधाई। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 29, 2015 at 8:26pm

इस प्रस्तुति पर बधाई... वर्तनी दोष पर आपका  ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ .... साथ ही निवेदन है कि ओबीओ पर प्रस्तुत रचनाओं को एक बार पढ़ जाइए ... सादर 

Comment by maharshi tripathi on July 29, 2015 at 6:52pm

अच्छी  रचना पर बधाई आ. Deepu mundrawal जी |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service