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प्रेयसी ( लघुकथा )

" ओफ्फो... ये बारिश भी न , एन दफ़्तर जाने के समय ही शुरू होती है ,पता नहीं क्या बैर है मुझसे । आज इतनी जरूरी मीटिंग है कि , अवकाश भी नहीं ले सकती ।" दीपा बड़बड़ाती बालकनी में खड़ी वर्षा रुकने की प्रतीक्षा करने लगी ।

तभी अंदर से लिखने में व्यस्त पति महोदय का आदेशात्मक स्वर कानों से टकराया , " दीपा ! समय है , तो एक प्याला चाय ही बना दो ।"

" जी ! बना देती हूँ ।" कह , मन ही मन बड़बड़ाते हुए रसोई में चली गई ।" बस जब देखो अपनी पड़ी रहती है , ये नहीं खुद गाड़ी से छोड़ आते । पर नहीं ।साहब तो लेखक ठहरे , कलम बीच में छोड़ कैसे उठ सकते हैं ? आग लगे मुई को ।"

"ये लीजिये चाय । अरे ! आप तैयार ... कहीं जा रहे हैं क्या ?"

" हाँ , अपनी कहानी की पात्रा , मेरी प्रेयसी को उसके दफ़्तर छोड़ने ।"

मौलिक व अप्रकाशित ।

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Comment by Omprakash Kshatriya on July 16, 2015 at 9:01pm
बहुत ही सुन्दर व रोचक लघुकथा लिखीहै आप ने
Comment by Omprakash Kshatriya on July 16, 2015 at 9:01pm
बहुत ही सुन्दर व रोचक लघुकथा लिखीहै आप ने
Comment by jyotsna Kapil on July 15, 2015 at 10:06pm
सुंदर और रोचक कथा आ.शशि बंसल जी,हार्दिक बधाई।
Comment by vijay nikore on July 15, 2015 at 9:46pm

 लघु कथा अच्छी लगी। बधाई।

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 15, 2015 at 6:38pm
रोचक एवं संवेदनशील, बधाई, आदरणीय सुश्री शशि बंसल जी, सादर।
Comment by विनय कुमार on July 15, 2015 at 6:31pm

चलिए लेखकों को भी अच्छा बता दिया , बढ़िया लघुकथा आदरणीया शशि बंसल जी..

Comment by kanta roy on July 15, 2015 at 5:48pm
वो कभी बीवी से बढकर हमें जाने ये हसरत ही रही है .... ओ सपनें बेचने वालों कुछ सस्ते से भाव में हमें भी कुछ सपने देते जाना .....
सुंदर लघुकथा आदरणीया शशि जी हमेशा की तरह । बधाई
Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 15, 2015 at 4:51pm

आदरणीया shashi bansal जी अब तो आपने भी मान लिया कि लेखक भी अच्छे दिल के होते हैं .....सुंदर प्रस्तुति के लिये बधाई ....सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 14, 2015 at 11:21pm

आदरणीया शशि जी, बहुत सुन्दर, सकारात्मक और सुखांत वाली एक सफल लघुकथा. इसमें कोई शक नहीं कि आपकी बेहतरीन लघुकथाओं में से ये एक है. इस सकारात्मक लघुकथा की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on July 14, 2015 at 9:25pm

" हाँ , अपनी कहानी की पात्रा , मेरी प्रेयसी को उसके दफ़्तर छोड़ने ।"

बहुत खूब , सादर बधाई 

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