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बुझ रहा है हौसला मौला

२१२ २२१२ २२
बुझ रहा है हौसला मौला
राह कोई तो दिखा मौला

नाम पे उसके छलकते हैं
आँख दरिया है' क्या मौला

जैसे पढ़ते हैं किताबों को
काश पढ़ते चेहरा मौला

शाख पर हम घर बनाते गर
हौसला होता जवाँ मौला

जेब खाली और मैं मुज़रिम
जिंदगी है गुमशुदा मौला

रात आधी और नींद नहीं
है उसी का सब किया मौला

है उसे कोई फ़िक्र ही कब
ख़्वाब देकर चल दिया मौला

मन अभी जो बादलों में था
वो ज़मी पे आ गिरा मौला

दर्द हद से भी जियादा है
टूटना है दिल बुरा मौला

बेवफ़ा वो हो गया शायद
डूबता है मन मेरा मौला

करके मोहब्बत 'परी' देखो
आ गए हम हैं कहाँ मौला


© परी ऍम. 'श्लोक'
"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment

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Comment by Pari M Shlok on July 10, 2015 at 9:29am
Sushil Sarna जी आपका दिल से आभार ..........!!
Comment by Pari M Shlok on July 10, 2015 at 9:26am
vinaya kumar singh जी पसन्दीदगी के लिए तहे दिल से शुक्रिया
Comment by Pari M Shlok on July 10, 2015 at 9:22am
फ़िक्र का वज़न १२ है शायद कृपया बताएं
चेहरा का नहीं मालूम था मगर कहाँ और जवाँ दोनों पर शक था की काफ़िया गलत है हम सही करके पेश करेंगे जो शेर ग़ज़ल में सही नहीं है आपका मार्गदर्शन हमेशा चाहिए :)
मिथिलेश वामनकर जी
Comment by विनय कुमार on July 9, 2015 at 11:20pm

// जेब खाली और मैं मुज़रिम
जिंदगी है गुमशुदा मौला //, वाह , वाह , बहुत खूब । बधाई आपको आदरणीय..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 9, 2015 at 8:30pm
आदरणीया परी जी
बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई।
जवां चेहरा और कहाँ काफ़िया नहीं हो सकते इस ग़ज़ल में

फ़िक्र ही कब-वाले शेर में बह्र देख लीजियेगा।
Comment by Sushil Sarna on July 9, 2015 at 8:02pm

दर्द हद से भी जियादा है
टूटना है दिल बुरा मौला

बेवफ़ा वो हो गया शायद
डूबता है मन मेरा मौला

सुंदर भावों से सजी इस ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीया. .

Comment by kanta roy on July 9, 2015 at 6:26pm
दर्द हद से भी जियादा है
टूटना है दिल बुरा मौला

बेवफ़ा वो हो गया शायद
डूबता है मन मेरा मौला.......... बहुत खूब मोहब्बत में अल्फाज पिरोये है आपने आदरणीया परी एम श्लोक जी .... बधाई

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