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गजल---दिल है जो तेरा आशिक उसकी खता नहीं है ।।

२२१ २१२२ २२१ २१२२

हूँ जो नशे में धुत मैं मय का नशा नहीं है।
यह इब्तिदा-ए-उल्फत है इन्तिहा नहीं है ।।

किस ओर जाके खोले बोतल शराब की ये।
उनकी गली से अब तक हम आशना नहीं है ।।

ऐसा करूं मैं क्या जो तू खुद गले लगा ले।
तू ही बता दे मुझको, मुझको पता नहीं है ।।

है मय ये तेरी आँखें सावन है तेरी जुल्फे।
दिल है जो तेरा आशिक उसकी खता नहीं है ।।

हर रोज सोचता हूँ कह दूँ मैं आज उनसे।
अब प्यार तो बहुत है पर हौसला नहीं है ।।

ताउम्र काट दे जो इक नाम के सहारे।
अब आशिको में 'राहुल' ऐसी वफा नहीं है ।।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Rahul Dangi Panchal on June 18, 2015 at 7:24pm
आदरणीय kanta roy जी शुक्रिया
Comment by maharshi tripathi on June 18, 2015 at 7:20pm

ताउम्र काट दे जो इक नाम के सहारे।
अब आशिको में 'राहुल' ऐसी वफा नहीं है ,,दिली दाद कुबुलें आ. Rahul Dangi जी |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 18, 2015 at 7:03pm

आ० राहुल जी

  आपकी  गजल के कुछ शेर तो कमाल के है . सादर .  

Comment by Samar kabeer on June 18, 2015 at 3:05pm
जनाब राहुल डांगी जी,आदाब,बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।

"किस ओर जाके पीये दिल खोलकर ये बोतल
कू-ए-यार से अभी तक हम आशना नहीं है"

इस शैर के बारे में जनाब वीनस जी बता ही चुके हैं,अगर इसे इस तरह कर लें तो उचित होगा :-

"किस ओर जाके पीलें दिल खोल कर ये बोतल
उस राह से अभी तक दिल आशना नहीं है"

"ऐसा करूं मैं क्या जो तू खुद गले लगा ले
तू ही बता दे मुझको, मुझको पता नहीं है"

इस शैर के सानी मिसरे में "मुझको-मुझको" की तकरार अच्छी नहीं लगती,सानी मिसरा इस तरह कर लें तो बयान साफ़ हो जाएगा :-

"ये बात तू बता दे ,मुझको पता नहीं है"

बाक़ी शुभ शुभ ।
Comment by वीनस केसरी on June 18, 2015 at 1:54pm

वाह राहुल साहब शानदार ग़ज़ल से मंच को नवाज़ा है ...
ढेरो दाद


किस ओर जाके पीये दिल खोलकर ये बोतल।..........सही उच्चारण पिये  १२ होता है 
कू-ए-यार से अभी तक हम आशना नहीं है ।। ..........कू-ए-यार का वज्न २१२१ या २२२१ होता है

Comment by kanta roy on June 18, 2015 at 12:04pm
हर रोज सोचता हूँ कह दूँ मैं आज उनसे।
अब प्यार तो बहुत है पर हौसला नहीं है ।....... बहुत खूब शेर कही है आपने आदरणीय आदरणीय राहुल दांगी जी .... बधाई आपको इस खूबसूरत गजल के लिए
Comment by Rahul Dangi Panchal on June 18, 2015 at 11:25am
आदरणीय narendrasinh chauhan जी शुक्रिया
Comment by narendrasinh chauhan on June 18, 2015 at 11:21am

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