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ग़ज़ल - फिल बदीह -- अब ज़रा सा मुस्कुराना आ गया ( गिरिराज भंडारी )

 2122    2122    212

क्या वही फिर से ज़माना आ गया ?

आदमी को दोस्ताना आ गया

 

शर्म उनकी आँखों मे दिखने लगी

इसलिये नज़रें चुराना आ गया

 

फ़िक्र अब करते नहीं यादों की हम

अब हमें उनको भुलाना आ गया

 

ऊब कर रोने से दिल को देखिये  

अब ज़रा सा मुस्कुराना आ गया

 

जब से बातिल हो गये अहबाब सब

आइनों से मुँह छिपाना आ गया

 

प्यार की फित्नागिरी तो देखिये - फित्नागिरी - जादूगरी

बेसुरों को गुनगुनाना आ गया

 

आप के पीछे चली आयी बहार

और मौसम शाइराना आ गया

 

हाथ कासे तक गया तो था मगर  -- कासा= भिक्षा पात्र

याद अपना फिर घराना आ गया

 

रफ़्ता रफ्ता रास्ता कटता गया

और अपना भी ठिकाना आ गया

*********************************

मौलिकेवँ अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 6, 2015 at 6:10am

आदरणीय सौरभ भाई , आपको संतुष्ट कर पाता हूँ तो अतीव प्रसन्नता होती है , आपकी दुआओं से मेरा मन भीगा हुआ है । आभार क्या कहूँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 6, 2015 at 6:08am

आदरणीय मिथिलेश भाई , हौसला अफज़ाई का बेहद शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 6, 2015 at 6:07am

आदरणीय सोमेश भाई , आपका बहुत बहुत आभार ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 6, 2015 at 1:05am

जय हो..

आजकल आप कमाल कर रहे हैं आदरणीय !  दिल से दुआ और आनन्द से दाद लीजिये..

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 25, 2015 at 10:19pm

आदरणीय गिरिराज सर 

बढ़िया ग़ज़ल हुई है शेर दर शेर दाद हाज़िर है.

बेहतरीन शेर -

हाथ कासे तक गया तो था मगर 

याद अपना फिर घराना आ गया

Comment by somesh kumar on June 20, 2015 at 5:02am
सूंदर रचना आदरणीय। बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 18, 2015 at 2:22pm

आदरणीय वीनस भाई , गज़ल पर आपको देख के मन प्रसन्न हो जाता है , तारीफ का शुक्रिया ॥ आ. समर की बात समझ गया हूँ , बदलाव कर  लूंगा ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 18, 2015 at 2:21pm

आदरणीय कृष्णा भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 18, 2015 at 2:20pm

आदरणीय केवल भाई , आपका बहुत शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 18, 2015 at 2:19pm

आदरणीय नरेन्द्र भाई , हौसला अफज़ाई का शुक्रिया ।

कृपया ध्यान दे...

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