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नूतन वर्ष सुहाना आता 
-------------------------
नूतन वर्ष सुहाना आता 
माता की गोदी में चढ़ कर
मन ही मन हर्षाता

 

दिनकर चुनरी लाल उड़ाता 
शीतल पवन झकोरे लाता 
कच्ची कच्ची धूप मनोहर 
मलिया शगुन सुनाता

 

बगिया की गोदी में खिल कर 
दिवस मल्हारें गाता ।

 

कलियाँ खिल कर युवा हो गईं 
झोली भर कर सुगंध ले आईं 
अंगनाई उर महके चन्दन 
तितली काया सौरभ धोई

 

भोर की गोदी सूरज चढ़ कर
स्वर्णिम छटा लुटाता ।

 

झरने की कल-कल निनाद 
मन के मिट जाते विषाद 
मैत्री की मंशा उर में ले
मिट जाते सारे कटु विवाद

 

अंबर की गोदी में चढ़ कर 
चाँदनिया  चाँद लुटाता ।

 

नूतन वर्ष सुहाना आता 
माता की गोदी से चढ़ कर
मन ही मन हर्षाता

अप्रकाशित व मौलिक 

कल्पना मिश्रा बाजपेई

Views: 757

Comment

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Comment by vijay nikore on March 24, 2015 at 11:01am

अति सुन्दर। बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 23, 2015 at 8:17am

आदरणीया कल्पना जी बहुत सुन्दर प्रस्तुति है हार्दिक बधाई निवेदित है. 

इन पंक्तियों में तुकांतता बाधित कर रही है रचना के सौन्दर्य को... मेरे हिसाब से... इसलिए निवेदन कर रहा हूँ-

कलियाँ खिल कर युवा हो गईं 
झोली भर कर सुगंध ले आईं 
अंगनाई उर महके चन्दन 
तितली काया सौरभ धोई

सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 23, 2015 at 8:11am

आ0 Hari Prakash Dubey जी आप का आभार 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 23, 2015 at 12:31am

आदरणीया कल्पना मिश्रा जी, इस सुन्दर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई ! सादर 

अंबर की गोदी में चढ़ कर 
चाँदनिया  चाँद लुटाता । 

नूतन वर्ष सुहाना आता 
माता की गोदी से चढ़ कर
मन ही मन हर्षाता.......वाह

Comment by kalpna mishra bajpai on March 22, 2015 at 10:10pm

आ० Er. Ganesh Jee "Bagi" सर आपका बहुत आभार /सादर 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 22, 2015 at 8:29pm

शब्द-शब्द मोती से गुथे हैं, सुन्दर और प्रभावशाली नवगीत पर बधाई आदरणीया कल्पना मिश्रा जी.

Comment by kalpna mishra bajpai on March 22, 2015 at 1:52pm

आ० maharshi tripathi  जी आप का आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 22, 2015 at 1:52pm

आ० Dr. Vijai Shanker  जी आप का आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 22, 2015 at 1:52pm

आ0 डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर आपका आभार /सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 21, 2015 at 8:47pm

आ० कल्पना जी

सुन्दर प्रस्तुति . सही शब्द 'मल्हार ' और 'मंशा'  है .तितली काया सदली धोई ------ भाव स्पष्ट नही  हो रहा . कविता में  रमणीयता बहुत है  . सादर .

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