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कोकून :हरि प्रकाश दुबे

अपने कोकून को

तोड़ दिया है मैंने अब

जिसमे कैद था, मैं एक वक़्त से

और समेट लिया था अपने आप को

इस काराग्रह में ,एक बंदी की तरह !

निकल आया हूँ बाहर , उड़ने की चाह लिए

अब बस कुछ ही दिनों में, पंख भी निकल आयेंगे

उड़ जाऊंगा दूर गगन में कहीं , इससे पहले की लोग

मुझे फिर से ना उबाल डालें , एक रेशम का धागा बनाने के लिए

और उस धागे से अपनी , सतरंगी साड़ियाँ और धोतियाँ बनाने के लिए !!

 

© हरि प्रकाश दुबे

“मौलिक व अप्रकाशित “

Views: 877

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Comment by Hari Prakash Dubey on March 15, 2015 at 11:40am

आदरणीय गिरिराज भंडारी सर, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया से आत्मिक  प्रसन्नता हुई, हार्दिक आभार ! सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 15, 2015 at 9:27am

वाह ! आदरणीय हरि प्रकाश भी , नये बिम्ब से बढिया बात कही है , हार्दिक बधाई ।

Comment by Hari Prakash Dubey on March 15, 2015 at 8:24am

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी, आपकी प्रतिक्रिया से बहुत उत्साह मिला आपका बहुत - बहुत धन्यवाद ! सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 14, 2015 at 9:14pm

आदरणीय हरिप्रकाश भाई जी , सुन्दर भावाभिव्यक्ति के लिए बहुत बहुत बधाई |

Comment by Hari Prakash Dubey on March 14, 2015 at 10:29am

आदरणीय खुर्शीद साहब, रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार, अभिनन्दन ! सादर   ,

Comment by Hari Prakash Dubey on March 14, 2015 at 10:26am

सोमेश भाई ,आपकी शुभकामनाओं के लिए आपका ह्रदय से आभार ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 14, 2015 at 10:22am

भाई कृष्ण मिश्र जी,रचना पर आपकी उत्साहित करती प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार  !

Comment by Hari Prakash Dubey on March 14, 2015 at 10:18am

आदरणीय शिज्जु "शकूर" साहब , इस रचना पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार ! सादर 

Comment by khursheed khairadi on March 14, 2015 at 9:41am

उड़ जाऊंगा दूर गगन में कहीं , इससे पहले की लोग

मुझे फिर से ना उबाल डालें , एक रेशम का धागा बनाने के लिए

और उस धागे से अपनी , सतरंगी साड़ियाँ और धोतियाँ बनाने के लिए !!

 आदरणीय हरिप्रकाश जी ,सादर अभिन्दन इतनी सुन्दर भावाभिव्यक्ति के लिए बहुत बहुत बधाई |

Comment by somesh kumar on March 14, 2015 at 8:47am

कोकून से बाहर आने पर बधाई भाई जी ,उम्मीद है कि अपने परों को पा लेने पर आप लम्बी उड़ान भरेंगे और आपके रेशमी मनोभावों में लिपट सारा साहित्य जगत एक विशेष अनुभूति करेगा |

सादर आपका अनुज 

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