For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बला-ए-इश्क़ ‘’जान गोरखपुरी’’

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

कुम्हलाए हम तो जैसे सजर से पात झड़ जायें

यु दिल वीरां कि बिन तेरे चमन कोई उजड़ जायें

मिरी आव़ाज में है अब चहक उसके आ जाने की
सितारों आ गले लूँ लगा कि हम तुम अब बिछड़ जायें

कि बरसों बाद मिलके आज छोड़ो शर्म एहतियात
लबों से कह यु दो के अब लबों से आ के लड़ जायें

न मारे मौत ना जींस्त उबारे या ख़ुदा खैराँ
बला-ए-इश्क़ पीछे जिस किसी के हाय पड़ जायें

बना डाला ग़मों के साहिलों ने ‘’जान’’ को दरिया
रस्ता पर्वत दिए जाये अगर हम राह अड़ जायें

‘’मौलिक व् अप्रकाशित’’

Views: 760

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 9, 2015 at 11:06pm

हौसलाफजाई के लिए तहेदिल से शुक्रिया गुमनाम भाई!! मेरे समझ से उच्चारण में 'कु'+ 'म्ह'+ 'ला' + 'ए' १२२

२ आएगा, कुम् +हलाए नही... इसी प्रकार मुझ पर अपना स्नेह बनाये रक्खें!! 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 9, 2015 at 10:00pm

भाई कृष्ण मिश्रा जी , सुन्दर रचना है 

बना डाला ग़मों के साहिलों ने ‘’जान’’ को दरिया 
रस्ता पर्वत दिए जाये अगर हम राह अड़ जायें....बहुत खूब ,बधाई आपको !

Comment by gumnaam pithoragarhi on March 9, 2015 at 9:54pm

कुम्हलाए 2122 ,,,,,,,,,,,,,,,,, शायद इसकी तक्तीअ ऐसी हो ......
ग़ज़ल अच्छी कही है बधाई

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 9, 2015 at 6:11pm

शुक्रिया आ० shyam mathpal जी!!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 9, 2015 at 6:10pm

 बहुत बहुत शुक्रिया महर्षि भाई!!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 9, 2015 at 6:08pm

हौसलाफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया सोमेश भाई!!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 9, 2015 at 6:04pm

आ० डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी आभार! त्रुटियाँ सुधरने में प्रयासरत हूँ!!इसी प्रकार अपना स्नेह बनाये रक्खें!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 9, 2015 at 5:58pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी बहुत बहुत आभार! प्रयास की सराहना के लिए! कुछ जगहों पे मात्र गिरा कर संतुलन बनने का प्रयास किया है!

और कुछ स्थानों पर शब्दों का मोह नही छोड़ पाया! जैसे एहतियात में 'त' बेबहर हो गया है! और ''रस्ता'' का वजन १'२ न होकर २'२ होगा !! एहतियात और रस्ता की जगह अन्य किसी शब्द के प्रयोग में लेने पर शेर की खूबसूरती कम होती दिखती है! एहतियात को एहतियाँ कर दूँ?क्या ये सही अर्थ देगा?अन्य त्रुटियों पर भी मार्गदर्शन का आकांछी हूँ!!आ० मार्गदर्शन करें!!

Comment by maharshi tripathi on March 9, 2015 at 5:47pm

आपकी गजल काफी सुन्दर है आपको ढेरों बधाई आ.बड़े भाई कृष्णा मिश्रा जी |

Comment by Shyam Mathpal on March 9, 2015 at 4:35pm

Aadarniya,

Mishra Ji badhai.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
7 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
21 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service