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फागुन लालित्य पर ... सार ललित छंद

छन्न पकैया, छन्न पकैया, बाबा देवर लागें
फागुन रुप  धरे मतवाला,भाव सुहाने जागे ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, राधा है शरमीली
अस्सी गज का लहँगा पहने,चोली रंग रँगीली ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, आम्र सुनहरे बौरे
केसर के नव पल्लव उगते, घूमें लोलुप भौरे ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया,पिक बयनी हरषाए
कुहू-कुहू करती रहती वो, सबके मन को भाए ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, गेंदा चम्पा महके
शीतल मंद सुगंध हवा में, प्रेमी जोड़ा बहके  ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया,टेसू मन लहकाये
पर तितली के हैं रंगीले, फरर-फरर लहराये ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, मोहन रास रचाए
राधा ललिता की  टोली ने ,ब्रज में धूम मचाए॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, रजत हो गईं रातें
मधुवन में बैठे मन मोहन, श्यामा से हैं बातें॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया , भौरे करते गुंजन
खिली-खिली बेसुध सी कलियाँ, करता वो आलिंगन ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, दिनकर आँगन उतरा
सोने से खलिहान हो गए, दिन ढलता कतरा-कतरा ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, नभ पर तारे चमके
वन उपवन चाँदी से लगते, फूल खिले हैं मनके॥

मौलिक व अप्रकाशित

कल्पना मिश्रा बाजपेई

Views: 926

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Comment by kalpna mishra bajpai on March 3, 2015 at 4:53pm

आ0लक्ष्मण रामानुज लडीवाला सर आभारी हूँ /सादर  

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 1, 2015 at 7:13pm

सुंदर और सरस भावों में रचा सार छंद बेहद पसंद आया | हार्दिक बधाई आदरणीया  कल्पना मिश्रा बाजपाई जी 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 1, 2015 at 6:44pm

आ०  somesh kumar जी आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 1, 2015 at 6:44pm

आ०  maharshi tripathi जी आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 1, 2015 at 6:43pm

आ० Shyam Narain Verma सर बहुत आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 1, 2015 at 6:43pm

आ०Hari Prakash Dubey सर आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 1, 2015 at 6:42pm

आ० मिथिलेश वामनकर  सर आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 1, 2015 at 6:42pm

आ० डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव  सर आप का सुझाव सिर आँखों पर बहुत आभार /सादर 

Comment by somesh kumar on March 1, 2015 at 11:29am

छन्न पकैया, छन्न पकैया, कविता ये  हरषाए 
भाव रंगी होली रंगो में , सबके मन को भाए ॥

Comment by Hari Prakash Dubey on March 1, 2015 at 8:52am

आदरणीया कल्पना मिश्रा बाजपेई जी बहुत सुन्दर प्रस्तुति है !आपको हार्दिक बधाई। सादर 

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