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आम्र मंजरी झूमती ,मादक महके बाग

-हर्षित कोयल कूकती,बौराया सा काग ।

 

बाबा देवर बन गए, फागुन में वो बात

ललचाये हर बाल मन,रंगों की बारात ।

 

नई कोपलें भर रहीं,जीवन में मकरंद

लहक रही मद कामनी,उर में भर आनंद ।

 

लाल टिकुलिया चाँद सी,कजरारे से नैन

बतियाने पनघट लगे ,फागुन गाती रैन ॥    

मौलिक व अप्रकाशित 

कल्पना मिश्रा बाजपेई 

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 25, 2015 at 12:23pm

वैसे तो मेरी टिप्पणी दिख नहीं रही, आदरणीया कल्पनाजी, किन्तु, आपकी स्वीकृति हमें भी सचेत और आश्वस्त रखती है. यों, मेरे कहे का हेतु पूर्ण हो गया है.
सादर

Comment by kalpna mishra bajpai on February 25, 2015 at 11:22am

आ० maharshi tripathi जी आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on February 25, 2015 at 11:22am

आ०  khursheed khairadi  जी आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on February 25, 2015 at 11:21am

आ०  मिथिलेश वामनकर जी आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on February 25, 2015 at 11:21am

आ० Hari Prakash Dubey जी आभार  

Comment by kalpna mishra bajpai on February 25, 2015 at 11:20am

आ० जितेंद्र भाई जी आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on February 25, 2015 at 11:20am

आ० सौरभ जी आप ने सही कहा टिकुलिया गलती से गलत लिख गया है सही कर देती हूँ आभार /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on February 25, 2015 at 11:18am

आ० सौरभ जी ,आप ने सही कहा लिखने में गलती हुई है आप का बहुत आभार /सादर 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 25, 2015 at 10:40am

फाल्गुन माह पर बहुत सुंदर दोहावली प्रस्तुति, आदरणीया कल्पना दीदी. हार्दिक बधाई आपको

Comment by Hari Prakash Dubey on February 25, 2015 at 10:22am

आदरणीया कल्पना मिश्रा बाजपेई  जी ,सुन्दर दोहावली,

लाल टिकुलीया चाँद सी,कजरारे से नैन

बतियाने पनघट लगे ,फागुन गाती रैन ॥  ..वाह , हार्दिक बधाई आपको ! सादर  

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