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"पुष्प हरसिंगार का "

"गीत"
_____

श्याम घन नभ सोहते ज्योँ ग्वाल दल घनश्याम का ।

चंचला यमुना किनारे नृत्य रत ज्योँ राधिका ||


आ रहे महबूब मेरे
दिल कहे श्रृँगार कर ।

द्वार पर कलियाँ बिछा कर
बावरी सत्कार कर ।

प्यार पर सब वार कर
-दुल्हन सदृश अभिसार कर ।

अब गले लग प्राण प्रिय से
डर भला किस बात का |

श्याम घन नभ सोहते ज्योँ ग्वाल दल घनश्याम का ।

चंचला यमुना किनारे नृत्य रत ज्योँ राधिका ||

चाहती पलकें भी बिछना
हर कदम पर प्यार से |

कह रही हैं धडकनें भी
नाथ आ अब द्वार पे |

खिल गई चम्पा निशा में
भाव तीव्र सत्कार रख |

झुक गईं सब डालियाँ भी
पुष्प हर सिंगार का ||

श्याम घन नभ सोहते ज्योँ ग्वाल दल घनश्याम का ।

चंचला यमुना किनारे नृत्य रत ज्योँ राधिका ||

(मौलिक अप्रकाशित )

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Comment by Chhaya Shukla on September 16, 2014 at 9:41am

जवाहर लाल सिंह जी अतिशय आभार आपका सादर नमन ! 

Comment by Chhaya Shukla on September 16, 2014 at 9:39am

बहन सीमाहारी शर्मा जी दिल से धन्यवाद सादर नमन !

Comment by Chhaya Shukla on September 16, 2014 at 9:38am

भाई गोपाल कृष्ण भट्ट आकुल जी अतिशय आभार ! सादर नमन 

Comment by Chhaya Shukla on September 16, 2014 at 9:37am

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी अतिशय आभार सादर नमन ! 

Comment by Chhaya Shukla on September 16, 2014 at 9:36am

नीरज सिंह नीर जी अतिशय आभार सादर नमन ! 

Comment by Chhaya Shukla on September 16, 2014 at 9:35am

आ. सत्येन्द्र सिंह जी अतिशय आभार आपके प्रोत्साहन हेतु सादर नमन ! 

Comment by Chhaya Shukla on September 15, 2014 at 8:52pm

डॉ आशुतोष मिश्र जी अतिशय आभार सादर नमन !!

Comment by Chhaya Shukla on September 15, 2014 at 8:51pm

अतिशय आभार आ. नरेन्द्र सिंह चौहान जी सादर नमन ! 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 14, 2014 at 5:02pm

आदरणीया छाया जी ..मन को मोह लेने वाले इस शानदर रचना .के लिए और इस रचना को महीने की सर्व्श्रेस्थ रचना चुने जाने पर दोहरी बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by Satyanarayan Singh on September 14, 2014 at 11:09am

आ. छाया शुक्लाजी इस भावपूर्ण  सुन्दर गीत के सृजन  एवं   सुंदर गीत   माह  की  श्रेष्ठ  रचना के रूप में चयनित होने हेतु  आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं प्रेषित करता हूँ. 

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