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कुंडलिया छंद - लक्ष्मण लडीवाला

आँचल में ममता लिए, भरा ह्रदय में प्यार

क्या कोई भी दे सका,माँ सा प्यार दुलार

माँ सा प्यार दुलार, जिसे पाने को तरसे,

सर पर माँ जब हाथ,रखे तो प्रभु भी हरषे

कह लक्ष्मण मत टोक, लगाती टीका काजल

जीवन हो आबाद, मिले जब माँ का आँचल |

(2)

दोहा देखो छंद में,  सबका है  सरताज,

सभी शब्द हो शिल्प मय, तभी सजेगी साज

तभी सजेगी साज, छंद को गाकर देखे

मन में भरते भाव, सूर तुलसी के लेखे

लक्ष्मण ले आनंद, कबीर रचे वह मोहे

देना सबको मान, रचे जो लय में दोहे |

(मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 18, 2014 at 11:20am

छंद पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार श्री गिरिर्राज भंडारी जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 18, 2014 at 11:19am

आपका हार्दिक आभार श्री जितेन्द्र गीत भाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 17, 2014 at 5:18pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई , सुन्दर कुंडलिया रचना के लिये आपको बधाइयाँ ॥

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 16, 2014 at 10:45pm

बहुत सुंदर भाव, माँ तो माँ होती है जिसका सबसे ऊँचा स्थान होता है. बधाई आपको आदरणीय लक्ष्मण जी

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 16, 2014 at 4:52pm

दोने छंद रचना सराहने के लिए आपका बहुत बहुत आभार श्री अरुण शर्मा "अनंत" जी 

आँचल में ममता लिए, और ह्रदय में प्यार.----------उचित सुझाव है अरुण भाई 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 16, 2014 at 4:37pm

आपका हार्दिक आभार श्री राम शिरोमणि पाठक जी 

Comment by अरुन 'अनन्त' on May 16, 2014 at 3:21pm

आदरणीय लक्ष्मण सर जी दोनों ही कुण्डलिया छंद बहुत अच्छे बन पड़े हैं मेरी ओर से बधाई प्रेषित है स्वीकार कीजिये.

आँचल में ममता लिए, भरा ह्रदय में प्यार.. आदरणीय क्या भरा की जगह भरे नहीं होना चाहिए था या फिर ऐसा भी कह सकते थे

आँचल में ममता लिए, और ह्रदय में प्यार... यह केवल मात्र एक सुझाव है जो मुझे लगा क्षमा कीजियेगा. सादर

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 16, 2014 at 8:48am

आपका हार्दिक आभार आदरणीया कुन्ती मुकर्जी | सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 16, 2014 at 8:47am

माँ के आँचल को लेकर रचित छंद पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार श्री जवाहर लाल सिंह जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 16, 2014 at 8:46am

छंद सराहने के लिए आपका हार्दिक आभार श्री श्यामनारायण वर्मा जी 

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