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यह जीवन का चक्र है,पतझड़ फिर मधुमास!
बस कुछ दिन की बात है,हो क्यों मित्र उदास!!

नेता नित नित गढ़ रहे ,नये नये भ्रमजाल !
जनता भूखों मर रही,इनकी मोटी खाल !!

स्वाभिमान को बेचकर,क्रय कर लाये लोभ!
जानबूझकर ढो रहे,केवल कुंठित क्षोभ!!

झूठा ही इक बार तो,कर दो यूँ इकरार!
जीवित हो जाऊँ पुनः,कह दो मुझसे प्यार!!

माना तुमको है नहीं,अब तो मुझसे प्यार!
किया करो हँसकर कभी,बातें ही दो चार!!
*****************************************
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment

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Comment by वेदिका on April 19, 2014 at 11:47pm
माना तुमको है नहीं/
खिचड़ी अच्छी पकाई! शुभकामनाएं आदरणीय राम जी
Comment by अरुन 'अनन्त' on April 19, 2014 at 2:43pm

अनुज सभी दोहे बहुत ही सुन्दर बने हैं पसंद आये अंतिम दोहे के प्रथम चरण की मात्रा गणना पुनः कर लें. इन दोहों पर बधाई स्वीकारें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 19, 2014 at 2:00pm

आदरणीय राम शिरोमणी भाई , बहुत सुन्दर बातें दोहो के माध्यम से कहे हैं !! आपको बधाइयाँ !!

Comment by Sarita Bhatia on April 18, 2014 at 3:34pm

लाजवाब भाई 

झूठा ही इक बार तो,कर दो यूँ इकरार!
जीवित हो जाऊँ पुनः,कह दो मुझसे प्यार!!
माना तुमको रहा नहीं,अब तो मुझसे प्यार!
किया करो हँसकर कभी,बातें ही दो चार!!
Comment by Neeraj Nishchal on April 18, 2014 at 2:00pm

बहुत अच्छी अच्छी बातें कह सकने में समर्थ हुए हैं आप बहुत बहुत बधाई

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 18, 2014 at 9:43am

सुंदर सार्थक दोहावली, बधाई स्वीकारें आदरणीय राम जी

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