For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कविता -

शरीर में चुभे हुए काँटे

जो शरीर को छलनी करते हैं;

वह टीस 

जो दिल की धड़कन

साँसों को निस्तेज करती है

 

यह तुम्हें आनंद नहीं देगी

प्रेम का कोरा आलाप नहीं यह

वासना में लिपटे शब्दों का राग नहीं

छद्म चिंताओं का दस्तावेज़ नहीं

इसे सुनकर झूमोगे नहीं

 

यह तुम्हें गुदगुदाएगी नहीं

सीधे चोट करेगी दिमाग पर

तड़प उठोगे

यही उद्देश्य है कविता का

 

रात के स्याह-ताल पर 

नृत्य करने वाले नर-पिशाचों के लिए

नहीं होती कविता

 

कविता पैदा करती है

जिंदा लोगों में झुरझुरी

एक सिहरन!

           - बृजेश नीरज 

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 1317

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on April 18, 2014 at 8:42am

आदरणीय जितेन्द्र जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by coontee mukerji on April 18, 2014 at 1:13am

बाप रे.....बृजेश जी कितनी सहजता आ गयी है आपकी लेखनी और वाणी में. सरल होना कितना कठिन होता है...सादर

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 17, 2014 at 11:41pm

बहुत ही सशक्त पंक्तियाँ, सच कहा आपने आदरणीय बृजेश जी कविता जिन्दा लोगो में सिहरन पैदा करती है. हर कवि भावुक होता है परन्तु हर भावुक कवि नही . बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by बृजेश नीरज on April 17, 2014 at 8:59pm

आदरणीय नादिर साहब आपका बहुत-बहुत आभार!

Comment by बृजेश नीरज on April 17, 2014 at 8:59pm

आदरणीय चन्द्र शेखर पाण्डेय जी,

//पहले भाग में आपने कविता को एक ही साथ काँटों और टीस, की उपमा दी है, जबकि इनमें एक एक पुल्लिंग है और एक स्त्रीलिंग!!//

इसमें दिक्कत क्या है, यह मैं समझ नहीं सका! अपनी आपत्ति को स्पष्ट करने का कष्ट करें! 

//कविता के संज्ञानात्मक उद्देश्य को आपने काफी वरीयता दी है, वैसे भावात्मक पक्ष को भी नजरंदाज नहीं करना चाहिए।//

मैंने भावनात्मक पक्ष को नज़रअंदाज़ किया है क्या?

अपनी सीमित समझ के अनुसार ही इस रचना में अपनी बात कहने का प्रयास किया है. आपके सुझावों की प्रतीक्षा है!

रचना पर आपकी उपस्थिति के लिए आपका हार्दिक आभार! 

Comment by बृजेश नीरज on April 17, 2014 at 8:52pm

आदरणीय चंद्रेश जी बहुत आभार आपका!

Comment by बृजेश नीरज on April 17, 2014 at 8:51pm

आदरणीय मुकेश जी आपका बहुत-बहुत आभार!

Comment by बृजेश नीरज on April 17, 2014 at 8:51pm

आदरणीय लडीवाला जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on April 17, 2014 at 8:50pm
आदरणीया गीतिका जी आपका हार्दिक आभार!आपके अनुमोदन से बल मिला!
Comment by नादिर ख़ान on April 17, 2014 at 3:48pm

आदरणीय बृजेश जी,वाकई आपकी रचना सिहरन पैदा कर रही है। सार्थक रचना के लिए बधाई ...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Monday
Sushil posted blog posts
Monday
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Monday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service