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यादों का वो इक सफ़र है नाम दे गया [सरिता भाटिया]

जाने वाला साल सब सुख चैन ले गया
नयनों में है नीर दिल में दर्द दे गया /


क्या मनाएं साल उस बिन अब लगे न दिल
एक झटके में सभी अरमान ले गया /


मुस्कराएँ हम क्या तेरे बिन ओ साथी अब
खुशिओ का तू सारा ही सामान ले गया /


उसकी हर आहट का होता है मुझे गुमाँ
खुद को समझायें क्या वो संसार से गया /


याद आती उसकी है अब रात रात भर
यादों का वो इक सफ़र है नाम दे गया /


काटना है अब अकेले उस बिना सफ़र
जिन्दगी भर का गमे पैगाम दे गया /

मौलिक व् अप्रकाशित......

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 7, 2014 at 9:39pm

रचना मर्म स्पर्शी बन पड़ा है, इस खूबसूरत रचना के लिये बधाई स्वीकार करें

Comment by Sarita Bhatia on January 7, 2014 at 6:23pm

आदरणीय श्याम जी शुक्रिया 

Comment by Sarita Bhatia on January 7, 2014 at 6:22pm

आदरणीय गिरिराज जी हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on January 7, 2014 at 6:21pm

शुक्रिया मोहिनी जी 

Comment by Shyam Narain Verma on January 7, 2014 at 3:19pm
इस खूबसूरत रचना के लिये दिली दाद कुबूल करें .....

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 7, 2014 at 2:25pm

आदरणीया सरिता जी , बहुत दर्द है इस रचना मे , मै भी बह गया !! बहुत खूबसूरत रचना के लिये आपको बधाई ॥

Comment by mohinichordia on January 7, 2014 at 2:14pm

 खूबसूरत यादों  की कसम खाकर अपना सफर जारी  रखना होगा  |  चरैवेति- चरैवेति का हमारे शास्त्रों का सन्देश हर परिस्थिति में साथ रखें, जीवन अवश्य आगे बढ़ेगा | अभिव्यक्ति  मन हल्का करने के लिये अच्छा माध्यम है |

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