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ग़ज़ल - (रवि प्रकाश)

ग़ज़ल
बहर-।।ऽ।ऽ ।।ऽ।ऽ (प्रथम प्रयास)
..
कभी चाँदनी सी खिला करे,
कभी धूप बन के सजा करे।
..
सभी चाहतों से हों देखते,
तू नज़र-नज़र में बसा करे।
..
कोई ख़्वाब में हो सँवारता,
कोई राहतों की हवा करे।
..
जहाँ लड़खड़ाएँ क़दम वहीं,
कोई हाथ बढ़ के वफ़ा करे।
..
रहें मंज़िलें तेरे सामने,
हो कठिन डगर तो हुआ करे।
..
जिसे देखता हूँ मैं ख़्वाब में,
वही शख़्स तुझमें मिला करे।
..
मेरा फ़न रहे,तेरी सादगी,
मेरी हर ग़ज़ल ये दुआ करे॥
...
-मौलिक एवं अप्रकाशित।
-31.12.2013

Views: 761

Comment

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Comment by Ravi Prakash on January 8, 2014 at 8:46am
धन्यवाद जी !!!

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 7, 2014 at 11:20pm

दिल से बधाई स्वीकारें, रवि प्रकाश भाई

Comment by Ravi Prakash on January 7, 2014 at 9:15pm
धन्यवाद प्रियंका जी।
Comment by Ravi Prakash on January 7, 2014 at 9:12pm
आ॰ योगराज जी, सराहना तथा उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद। आशीर्वाद बनाए रखें॥
Comment by Priyanka singh on January 7, 2014 at 4:46pm

रहें मंज़िलें तेरे सामने,
हो कठिन डगर तो हुआ करे।
..
जिसे देखता हूँ मैं ख़्वाब में,
वही शख़्स तुझमें मिला करे।....वाह वाह बहुत खूब ग़ज़ल कही अपने ....बधाई आपको....


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on January 7, 2014 at 4:29pm

भाई रवि प्रकाश जी, डॉ बशीर बद्र साहिब की पसंसीदा बह्र को आधा करके बहुत ही बढ़िया अश'आर कहे हैं. दिल से बधाई दे रहा हूँ, स्वीकार करें।

Comment by Ravi Prakash on January 4, 2014 at 4:28pm
सराहना तथा उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद अरुण जी।
Comment by अरुन 'अनन्त' on January 3, 2014 at 3:34pm

भाई रवि प्रकाश जी वाह बेहतरीन ग़ज़ल शानदार अशआर हुए हैं खासकर ये दो अधिक पसंद आये बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

जिसे देखता हूँ मैं ख़्वाब में,
वही शख़्स तुझमें मिला करे। क्या कहने भाई
..
मेरा फ़न रहे,तेरी सादगी,
मेरी हर ग़ज़ल ये दुआ करे॥ वाह

Comment by Ravi Prakash on January 3, 2014 at 10:03am
सराहना तथा उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद आ॰ वंदना जी। आशीर्वाद बनाए रखें॥
Comment by vandana on January 3, 2014 at 5:27am

कभी चाँदनी सी खिला करे,
कभी धूप बन के सजा करे।

रहें मंज़िलें तेरे सामने,
हो कठिन डगर तो हुआ करे।

बहुत बढ़िया ग़ज़ल आदरणीय रवि जी 

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