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नया साल है चलकर आया देखो नंगे पांव

आने वाले कल में आगे देखेगा क्या गाँव

 

धधक रही भठ्ठी में

महुवा महक रहा है

धनिया की हंसुली पर

सुनरा लहक रहा है  

कारतूस की गंध

अभी तक नथुनों में है

रोजगार गारंटी अब तक

सपनों में है

हो लखीमपुर खीरी, बस्ती

या, फिर हो डुमरांव

कब तक पानी पर तैरायें

काग़ज़ वाली नांव !

 

माहू से सरसों, गेहूं को

चलो बचाएं जी

नील गाय अरहर की बाली

क्यों चर जाएं जी

ठंडी रात में बूढ़ा-माई

बडबड नहीं करें

हम अपने हिस्से का सूरज

खुद ही चलो गढ़ें

धूप कड़ी हो तो दे जाएं

थोड़ी थोड़ी छाँव

ठंडी ठंडी पुरवाई से

बेहतर है पछियांव.. .

****

मौलिक एवं अप्राकाशित 

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on January 2, 2014 at 9:05pm

आदरणीया महिमा जी गीत पसंद करने के लिए हार्दिक शुक्रिया 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on January 2, 2014 at 9:04pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी गीत को पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on January 2, 2014 at 9:04pm

आदरणीय गिरिराज जी गीत की आत्मा तक जाकर प्रतिक्रया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on January 2, 2014 at 9:03pm

आदरणीया कल्पना जी आप जैसा नवगीत का हस्ताक्षर अगर तारीफ करता है तो ख़ुशी मिलती है| हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on January 2, 2014 at 9:02pm

आदरणीय अजीत शर्मा जी गीत पसंद करने के लिए शुक्रिया 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on January 2, 2014 at 9:01pm

भाई चन्द्र शेखर पाण्डेय जी प्रतिक्रया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on January 2, 2014 at 9:00pm

आदरणीय  S. C. Brahmachari जी गीत के भाव पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on January 2, 2014 at 8:59pm

आदरणीया कुंती जी आपने गीत को समय और आशीर्वाद दिया यही इसकी सफलता है| नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on January 2, 2014 at 8:58pm

आदरणीय जितेन्द्र जी गीत आपको रुचा जानकर अच्छा लगा| आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on January 2, 2014 at 8:58pm

आदरणीय अजय शर्मा जी गीत आपको पसंद आया जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई| आपके जिले को तो प्रतीक के रूप मात्र लिया है ..यह तो हर जिले का ही हाल है| हार्दिक धन्यवाद 

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