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जब याद तेरी तडपाये
रातों को नींद न आये

कोई दर्द समझ न पाए
आने वाले अब तो आजा

सावन बीता जाए
जब याद तेरी तडपाये

बचपन में साथ जो खेले
सब दुःख सुख मिलकर झेले

हम रह गए आज अकेले
jab से वोह परदेस गए हैं

लौट कर फिर न आये
जब तेरी याद तडपाये

जब फैली तेरी खुशबू
सूखे आँखों में आंसू

है तुझमे ऐसा जादू
मिटटी को अगर हाथ लगा दे

तो सोना बन जाए
जब याद तेरी तडपाये

बरसे तेरी ज़ुल्फ़ के बादल
दिल हो गया मेरा पागल

यूँ ढूँढू तेरा आँचल
जैसे कोई प्रेमी पानी खो जाए

जब तेरी याद तडपाये
रातों को नींद न आये

Views: 488

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प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 8, 2010 at 4:13pm
Bahut sunder Aleem sahib.
Comment by asha pandey ojha on June 7, 2010 at 12:40pm
बचपन में साथ जो खेले
सब दुःख सुख मिलकर झेले

हम रह गए आज अकेले
jab से वोह परदेस गए हैंbahut sundar
Comment by Rash Bihari Ravi on June 3, 2010 at 3:03pm
bahut badhia
Comment by Kanchan Pandey on June 1, 2010 at 2:16pm
बचपन में साथ जो खेले
सब दुःख सुख मिलकर झेले

हम रह गए आज अकेले
jab से वोह परदेस गए हैं

Bahut badhiya aleem jee, achha likhey hai,
Comment by satish mapatpuri on May 31, 2010 at 2:25pm
बरसे तेरी ज़ुल्फ़ के बादल
दिल हो गया मेरा पागल

यूँ ढूँढू तेरा आँचल
जैसे कोई प्रेमी पानी खो जाए
बड़ा ही हसीन ख्याल और दिलकश अंदाज़ है अलीम साहेब, शुक्रिया.
Comment by Admin on May 30, 2010 at 9:41am
जब याद तेरी तडपाये
रातों को नींद न आये

कोई दर्द समझ न पाए
आने वाले अब तो आजा

वाह अलीम साहब वाह , बढ़िया लिखे है, बिरह वेदना को बहुत सुन्दरता के साथ अभिव्यक्त किया है आपने, धन्यवाद,
Comment by Biresh kumar on May 30, 2010 at 7:09am
जब फैली तेरी खुशबू
सूखे आँखों में आंसू
subhaanallah!!!!!!!!!!!!!!!

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 29, 2010 at 9:36pm
जय हो अलीम भाई , बहुत बढ़िया रचना लाये है, प्रीतम भाई ठीक कहते है, की ये सिलसिला अब रुकना नही चाहिये , धन्यबाद ,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 29, 2010 at 9:12pm
जब याद तेरी तडपाये
रातों को नींद न आये

कोई दर्द समझ न पाए
आने वाले अब तो आजा
waah aleem bhai waah.....ek aur dhamakedaar rachna......main dheere dheere aapka fan banta jaa raha hoon...
bahut accha likh rahe hian bhai...aapse ab yahi aagrah hai ki ye silsila kabhi roke nahin..

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