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साथ क्या दोगे मेरा तुम उस ठिकाने तक (ग़ज़ल "राज")

२१२२   २१२२  २१२२  २

जब तलक पँहुचे लहर अपने मुहाने तक
साथ क्या दोगे मेरा तुम उस ठिकाने तक

हीर राँझे की कहानी हो  बसी जिसमे
ले चलोगे क्या मुझे तुम उस जमाने तक

प्यार का सैलाब जाने कब बहा लाया
हम सदा डरते रहे आँसू बहाने तक

थी बहुत मासूम अपने प्यार की मिटटी
दर्द ही बोते रहे अपने बेगाने तक

क्यों करें परवाह हम अब इस ज़माने की
हर कदम पे जो मिला बस दिल दुखाने तक  

छोड़ दी किश्ती भँवर में देख साथी रे
जिंदगी गुजरे फ़कत अब इक फ़साने तक

तू मेरा महबूब अब ये जिंदगी तेरी
खूब गुजरेगी ख़ुदा के पास जाने तक
********************************

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 9, 2013 at 2:54pm

हीर राँझे की कहानी हो  बसी जिसमे
ले चलोगे क्या मुझे तुम उस जमाने तक 

क्यों करें परवाह हम अब इस ज़माने की
हर कदम पे जो मिला बस दिल दुखाने तक,,,,,,,बेहतरीन ग़ज़ल ..हर अशार शानदार ..एक प्रेमी दिल अंतस में उठती कामनाओं और प्रश्नों का शानदार चित्रण करती ग़ज़ल डरते डरते प्यार करते हैं प्यार करते करते डरते हैं ..कोई डर न हो ...आखिरी शेर तक यह डर ख़त्म हो गया ..ग़ज़ल का सुखद अंत एक बिश्वास के साथ ...वाकई दिल को छूने वाले रचना ...ढेरों बधाई ..सादर प्रणाम के साथ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 9, 2013 at 10:39am

प्रिय सरिता जी आपको ग़ज़ल पसंद आई हृदय तल से आभार आपका सस्नेह. 

Comment by Sarita Bhatia on December 9, 2013 at 10:29am

वाह दी वाह लाजवाब मतला और जानदार अशआर ,हार्दिक बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 9, 2013 at 10:19am

जीतेन्द्र गीत जी बहुत-बहुत शुक्रिया आपको ग़ज़ल पसंद आई ,ग़ज़ल के अशआर पाठकों के दिलो तक पंहुचे यही ग़ज़ल  का उद्देश्य होता है ख़ुशी है मुझे की उसमे ये ग़ज़ल कामयाब हो रही है ,तहे दिल से आभारी हूँ 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 9, 2013 at 10:06am

जब तलक पँहुचे लहर अपने मुहाने तक
साथ क्या दोगे मेरा तुम उस ठिकाने तक.........लाजवाब मतला,

थी बहुत मासूम अपने प्यार की मिटटी
दर्द ही बोते रहे अपने बेगाने तक..................क्या बात है, यह शेर बहुत पसंद आया

बहुत खुबसूरत गजल, हृदय से बधाई स्वीकारें आदरणीया राजेश जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 7, 2013 at 11:23pm

बैद्य नाथ जी आपकी सराहना पाकर बहुत उत्साहित हूँ मेरा लिखना सार्थक हुआ तहे दिल से आभार आपका. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 7, 2013 at 11:22pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायण जी तहे दिल से आभार आपका ग़ज़ल आपको पसंद आई. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 7, 2013 at 11:20pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी ग़ज़ल आपकी दाद पाकर धन्य हुई तहे दिल से आभारी हूँ. 

Comment by Saarthi Baidyanath on December 7, 2013 at 11:16pm

तू मेरा महबूब अब ये जिंदगी तेरी
खूब गुजरेगी ख़ुदा के पास जाने तक....इस शेर के लिए दिली दाद ..जिंदाबाद जिंदाबाद !....अच्छी ग़ज़ल हुई है ...:)

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 7, 2013 at 10:54pm

महनीया

क्या बात है  ? बहुत सुन्दर भाव  i

बधाई हो i

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