For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

***बुजुर्ग को सुनाते हैं …..***

बुजुर्ग को सुनाते हैं …..

हाँ
मानता हूँ
मेरा जिस्म धीरे धीरे
अस्त होते सूरज की तरह
अपना अस्तित्व खोने लगा है
मेरी आँखों की रोशनी भी
धीरे धीरे कम हो रही है
अब कंपकपाते हाथों में
चाय का कप भी थरथराता है
जिनको मैं अपने कंधों पर
उठा कर सबसे मिलवाने में
फक्र महसूस करता था
वही अब मुझे किसी से मिलवाने में
परहेज़ करते हैं
शायद मैं बुजुर्ग
नहीं नहीं बूढा बुजुर्ग हो गया हूँ
मैं अब वक्त बेवक्त की चीज़ हो गया हूँ
परिवार का एक ऐसा मोहरा हूँ
जिसे जब भी जरूरत पडी
शादी,त्यौहार में
बढ़िया लिबास में सजा कर
मेहमानों के सामने रख दिया
फिर अवसर निकलते ही
पुराने अखबार की तरह
घर के किसी कौने में
बिठा दिया
कांपते हाथों से अगर
सब्जी कमीज़ पर गिर पड़े
बावजूद लाख कोशिशों के अगर
अपनी लघु शंका नियंत्रित न हो पाए
बात करते करते
थूक मुंह से कपड़ों पे गिरने लगे
किसी की बात सुन पाने में असमर्थता हो
बहुत शोर होता है घर में
घर के अपनों से बैगानों में
सब को अपने दर्द नज़र आते हैं
मगर इन हाथों में कसमसाते
अपनों के रिश्तों को
एक बजुर्ग की आँख से
झर झर बहते यादों के
झरने नज़र नहीं आते
सूखी टहनियों से आती
सूर्य की रश्मियाँ उन्हें अब खलती हैं
मगर इस बजुर्ग वृक्ष की छाया में
खेले बचपन के पल उन्हें याद नहीं आते
बहुत रोते हैं पछताते हैं
जब घर की रौनक ये बुजुर्ग
दुनिया से चले जाते हैं
चलते हैं जब ज़िन्दगी तपती राहों पर
तब सूखी टहनियों का
मोल समझ जाते हैं
फिर अपना दर्द
फ्रेम में जड़े
बुजुर्ग को सुनाते हैं, बुजुर्ग को सुनाते हैं ……

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 702

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on December 2, 2013 at 5:26pm

a.Coontee mukerji rachna ke marm pr aapkee skaratmak pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by coontee mukerji on December 2, 2013 at 5:21pm

जीवन का सत्य....समझ जाना ही बहुत है

जब घर की रौनक ये बुजुर्ग
दुनिया से चले जाते हैं
चलते हैं जब ज़िन्दगी तपती राहों पर
तब सूखी टहनियों का
मोल समझ जाते हैं
फिर अपना दर्द
फ्रेम में जड़े
बुजुर्ग को सुनाते हैं, बुजुर्ग को सुनाते हैं..........साधुवाद

Comment by Sushil Sarna on December 2, 2013 at 5:16pm

aa.Gitika 'vedika' jee rachna ke marm pr aapkee saarthak pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by Sushil Sarna on December 2, 2013 at 5:15pm

aa.Meena Pathak jee rachna par aapkee gahan pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by Sushil Sarna on December 2, 2013 at 5:14pm

aa.Arun Sharma 'Anant' jee rachna pr aapkee prashansaatmak saarthak pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by वेदिका on December 2, 2013 at 1:57pm

वेदना मे बुरी तरह डुबोया सच्चा चित्रण हुआ है! 

बधाई तो नही दे सकती, किन्तु आपकी लेखनी को नमन करती हूँ!

Comment by Meena Pathak on December 2, 2013 at 1:53pm

निःशब्द हूँ पढ़ कर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 2, 2013 at 1:45pm

उफ्फ !!! आदरणीय शब्द नहीं हैं मेरे पास कुछ भी कहने के लिए आपसे जिस वेदना को शब्द दिए हैं. आपकी लेखनी को नमन आपको बहुत बहुत बधाई

Comment by Sushil Sarna on December 2, 2013 at 12:36pm

aa.Rajesh Mridu jee aapne rachna ka marm jaan apnee pratikriya vyakt kee yahee meree rachna kee saarthakta hai, aapka haardik aabhaar

Comment by राजेश 'मृदु' on December 2, 2013 at 12:01pm

हद से गुजरती पीढि़यां इस बात पर सोचती तक नहीं । इस मुद्दे को छूने एवं परत-दर-परत इस पीड़ा का सुंदर शब्‍दांकन हेतु आपको बधाई, सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
1 hour ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
15 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service