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कह देना पीहर से बढ़कर है मेरी ससुराल सखी--(गीत )

गाँव पँहुचने पर मैय्या जब पूछेगी मेरा हाल सखी

कह देना पीहर से बढ़कर है मेरी ससुराल सखी

मेरी  चिरैया कितना उड़ती

पूछे जब उन आँखों से 

पलक ना झपके उत्तर ढूंढें  

तब तू जाना टाल सखी

कह देना पीहर से बढ़कर है मेरी ससुराल सखी

पूछेगी फिर बेला चमेली

कितनी चढ़ी ऊँचाई  पर

इस घर में नही कोई सीढ़ी 

छोटी है दीवाल सखी  

कह देना पीहर से बढ़कर है मेरी ससुराल सखी

जब वो हंसती कितनी झरती  

मुक्तक मणियाँ मुखड़े से  

समझाना यहाँ मेरी झोली     

अब है मालामाल सखी  

कह देना पीहर से बढ़कर है मेरी ससुराल सखी

पूछेगी उसकी अँखियों का

कजरा अब कितना खिलता  

खोल के तू अपने हाथों से

देना ये रुमाल सखी

कह देना पीहर से बढ़कर है मेरी ससुराल सखी 

सुनके मेरी बातें अगर जो        

मैय्या का उर भर आये    

तुझको कसम है इस बहना की

लेना तू संभाल सखी

कह देना पीहर से बढ़कर है मेरी ससुराल सखी

********************************* 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2013 at 11:14pm

आदरणीय अखिलेश जी आपको गीत पसंद आया उसके भावों ने आपको प्रभावित किया ये रचना की सार्थकता हुई ,इस उत्साह वर्धन हेतु दिल से आभार आपका. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2013 at 11:12pm

नादिर खान भाई जी हृदय से शुक्रगुजार हूँ आपने गीत को दिल से महसूस किया उसके भावों का अनुमोदन किया ,मेरा लिखना सार्थक हुआ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2013 at 11:10pm

आदरणीय अरुण निगम जी आपको गीत पसंद आया,सराहना पाकर हर्षित हूँ बहुत- बहुत आभार आपका,मैंने अंतरा  की  पंक्तियाँ १७ ,१४ मात्राओं पर बाँधी हैं अतः उसी के अनुसार शब्द फिट करने का प्रयास किया है.  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2013 at 11:06pm

अन्नपूर्णा जी गीत आपको पसंद आया इसके भाव आपके दिल तक पंहुचे लिखना मेरा सार्थक हुआ दिल से आभार आपका 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2013 at 11:04pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायण जी आपने सही कहा ये भारतीय नारी के संस्कार ही हैं जो इतनी सहनशीलता,लोक लिहाज ,माँ बाप का प्यार उसके दिल में होता है जिसके कारण वो सब सहन करती हैं गीत का अनुमोदन करने हेतु आपका हार्दिक आभार.  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2013 at 11:01pm

आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी गीत आपको पसंद आया उसके मर्म का अनुमोदन हेतु हार्दिक आभार आपका. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2013 at 10:59pm

मीना पाठक जी गीत के भाव आपके हृदय को छू सके मेरा लेखन सार्थक हुआ बहुत -बहुत आभार आपका. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2013 at 10:57pm

प्रिय गीतिका सही है आपकी बात ,जीवन में न जाने कितनी बहनों के अनुभवों को बटोर कर आज शब्दों का रूप दिया है,इसके भाव अपना पक्ष रखने में सक्षम हुए तो ये रचना सार्थक हुई दिल से आभारी हूँ.  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2013 at 10:53pm

अरुण श्रीवास्तव जी गीत ने आपके दिल को प्रभावित किया मेरा लिखना सार्थक हुआ बहुत बहुत आभार आपका .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2013 at 10:51pm

आदरणीय लक्ष्मण जी गीत के भावों का अनुमोदन करने के लिए दिल से शुक्रिया,आप का कहना सही है गाँव में आज भी परिस्थति कम ही बदली है गाँव में ही क्यों शहरों में भी कोई भी लड़की माता पिता को दुःख देना नहीं चाहती उनको पता होता है कि किन सपनो के साथ बेटी का विवाह करते हैं उनके सपने ना टूटें इसलिए काफी हद तक एडजस्ट करने की कोशिश करती है ये उनके संस्कार ही तो हैं .बहुत बहुत आभार आपका.   

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