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!!! भंवर में डूब गयी नाव !!!
1212 1122 1212 22

उधार आज नहीं, कल नकद बताने से।
भंवर में डूब गयी नाव, भाव खाने से ।।

जवां-जवां है हंसीं है सुहाग रातों सी।
यहां गुलाब - चमेली महक जताने से।।

बड़े उदास सितारें जमीं पे टूट गिरे।
हंसी खिली कि चमेली मिली दीवाने से।।

कठोर रात सितारों पे फबितयां कसती।
हुजूर आप यहां, चांद डगमगाने से।।

शुभागमन है यहां भोर लालिमा जैसी।
सुगन्ध फैल गयी नम हवा बहाने से।।

के0पी0सत्यम-मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 10, 2013 at 11:56am

आ0 सुशील भाईजी,  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार। सादर

Comment by Sushil.Joshi on November 9, 2013 at 5:04am

सुंदर गज़ल हेतु बधाई स्वीकारें आ0 केवल भाई जी...

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 3, 2013 at 1:05pm

आदरणीय वीनस भाई जी,  आपके स्नेह और समर्थन हेतु आपका तहेदिल से बहुत-बहुत आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 3, 2013 at 1:05pm

आदरणीय  बृजेश भाई जी,  आपके स्नेह और समर्थन हेतु आपका तहेदिल से बहुत-बहुत आभार। सादर,

Comment by वीनस केसरी on November 2, 2013 at 11:30pm

सुन्दर भाव पूर्ण ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकारें

Comment by बृजेश नीरज on November 2, 2013 at 8:14am

इस सुन्दर रचना पर आपको हार्दिक बधाई!

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 31, 2013 at 7:00pm

आदरणीय अखिलेश भार्इ जी,  टंकण सही है, किन्तु परिवर्तित्त करने के समय कुछ दिक्कते आ जाती है। आपके अपार स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 31, 2013 at 6:58pm

आदरणीय भण्डारी भार्इ जी,  आपके अपार स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 31, 2013 at 6:57pm

आदरणीय विजय सर जी,  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by विजय मिश्र on October 31, 2013 at 6:01pm
वाह केवल भाई वाह , बधाई और दीपावली की शुभकामना भी .

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