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जो भी है आपका करम है सब ( ग़ज़ल ) गिरिराज भंडारी

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ज़र्फ़ अंदर न पास है दिल में

आ गया हूँ ,अदब की महफ़िल में

वक़्त रद्दे अमल का आया तो 

तुम रहम खोजते  हो क़ातिल में

कुछ तड़प , दर्द और बेचैनी

और क्या खोजते हो बिस्मिल में

 

फिर मुझे याद कर रहा है वो

फिर पड़ा होगा यार मुश्किल में 

 

अनमने से वो हाल पूछे जब

दर्द कैसे कहूँ है तिल तिल में

 

जो भी है आपका करम है सब

ज़र्फ़ खोजो न मुझसे जाहिल में

          ************

ज़र्फ़ – योग्यता , सलाहियत

पास - लिहाज

रद्दे अमलप्रतिक्रिया

मौलिक एवँ अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 17, 2013 at 7:37am

आदरणीय वीनस भाई , बहुत बहुत शुक्रिया , आपका गज़ल पर आने और गलतियों को सामने लाने के लिये आपका आभारी हूँ । एक एक कर सभी गलतियों सुधारने की कोशिश करूंगा ।

Comment by वीनस केसरी on December 17, 2013 at 4:06am

शुरू के तीन शेर वाकई बेहद शानदार हुए हैं .,.. मतला बहुत शानदार है

साहिल में .,.. का प्रयोग सही नहीं लगा
मुझसा जाहिल की जगह मुझ से जाहिल शायद ज़ियादा सही हो

Comment by वीनस केसरी on November 3, 2013 at 12:12am

ज़र्फ़ अंदर न पास है दिल में

आ गया हूँ ,अदब की महफ़िल में

वक़्त रद्दे अमल का आया तो 

तुम रहम खोजते  हो क़ातिल में


वाह जनाब आप तो छा गए


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 27, 2013 at 6:59pm

आदरणीय विशाल भाई , हौसला अफज़ाई के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!!!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 27, 2013 at 6:58pm

आदरणीय राम अवध भाई , गज़ल की सराहना और उत्साह वर्धन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!!!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on October 26, 2013 at 11:20pm

फिर मुझे याद कर रहा है वो

फिर पड़ा होगा यार मुश्किल में 

बहुत खूब गजल के लिये दिली मुबारकबाद सर जी !!!!

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on October 26, 2013 at 8:15pm

भार्इ भण्डारी जी गजब का काफिया गजब का शेर खुब निर्वाह किया है
जितनी तारीफ की जाये उतनी कम है।
वाकर्इ आपकी गजल में दम है।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 26, 2013 at 7:03pm

आदरणीय शरद भाई , गज़ल की सराहना कर उत्साह वर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार !!!!!!

Comment by शरद कुमार on October 25, 2013 at 10:52pm

फिर मुझे याद कर रहा है वो

फिर पड़ा होगा यार मुश्किल में .......सुन्दर ग़ज़ल के लिए बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 25, 2013 at 10:48pm

आदरणीय सौरभ भाई , आपने साहिल मे और साहिल पे का अंतर बहुत अच्छे से स्पष्ट कर दिया है !!! आपका हृदय से आभार !!! 

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