For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तेरी कान्हा बांसुरी, छेड़े ऐसी तान

जिसकी धुन में मन रमा, बिसरा सुध-बुध-ध्यान

बिसरा सुध-बुध-ध्यान, मोह के बंधन छूटे

जग माया का जाल, दर्प के दरपन टूटे

हुआ क्लेश का नाश, पीर सब हर ली मेरी

पर ये क्या बैराग? लुभाती है छवि तेरी !!

- बृजेश नीरज 

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 942

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 19, 2013 at 11:35am

कान्हा तेरी बांसुरी, छेड़े ऐसी तान

जिसकी धुन में मन रमा, बिसरा सुध-बुध-ध्यान

बिसरा सुध-बुध-ध्यान, मोह के बंधन छूटे

जग है माया जाल, दरपन छन्न से टूटे

हुआ क्लेश का नाश, पीर हर ली सब मेरी

ये कैसा बैराग, ह्रदय छवि कान्हा तेरी । 

भईया, मैंने कई कवि गण को पहले शब्द समूह को अंतिम शब्द समूह बनाते हुए पढ़ा है, उसी अनुसार "कान्हा तेरी" को अंतिम में प्रयोग किया है, क्या यह मान्य नहीं है ?

जग है माया जाल, छन्न से दरपन टूटे

ऐसे करने से बात बनेगी क्या ? 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 19, 2013 at 11:25am

जी, नियमतः,

१.  आप तो जानते ही हैं कि कुण्डलिया छंद का पहला शब्द या शब्दांश और उसका अंतिम शब्द या शब्दांश समान होते हैं.

२.  फिर, चौथे पद का विन्यास आपने बदल दिया है, वह भी रोला छंद के शब्द-संयोजन नियम के अनुसार नहीं है. दरपन शब्द चौकल है जो रोला के सम चरण का प्रारम्भ हो ही नहीं सकता. 

शुभेच्छाएँ


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 19, 2013 at 11:16am

//सुझाव के रूप में उद्दृत बंद तो कुण्डलिया छंद के विधान के हिसाब से ही ख़ारिज़ है !//
मैं समझा नहीं आदरणीय कृपया जरा और विस्तार दें । 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 19, 2013 at 11:07am

कान्हा तेरी बांसुरी, छेड़े ऐसी तान

जिसकी धुन में मन रमा, बिसरा सुध-बुध-ध्यान

बिसरा सुध-बुध-ध्यान, मोह के बंधन छूटे

जग है माया जाल, दरपन छन्न से टूटे

हुआ क्लेश का नाश, हर ली पीर सब मेरी

ये कैसा बैराग, ह्रदय छवि कान्हा तेरी ।

यह सुझाव कैसे दिया गणेश भाई आपने ?  सुझाव के रूप में उद्दृत बंद तो कुण्डलिया छंद के विधान के हिसाब से ही ख़ारिज़ है ! ..

:-(((

कृपया देख लीजियेगा.

आदरणीया राजेश कुमारीजी, आपने गणेश भाई के कहे का अनुमोदन तो किया है, लेकिन छंद प्रस्तुति के अंतिम पद को वही रहने दिया जो वस्तुतः मूल प्रस्तुति में है -- ये कैसा बैराग ? लुभाती है छवि तेरी .

सही कहा जाय, तो यही पद वाकई मूल प्रस्तुति का अति उत्कृष्ट पद है, किसी पंच लाइन की तरह, जो गोपिकाओं के ’बैराग’ में प्रतीत हो रहे विरोधाभास को समक्ष ला रहा है.

बैरागियों के हृदय में किसी उत्कृष्टतम की छवि का होना असंभव नहीं है, जबकि किसी छवि का ’लुभाना’ बैरागियों के लिए निषिद्ध है ! .. :-))) 

यही विरोध तो उक्त पद की सुन्दरता है जो कुण्डलिया की विशेषता बन कर उभरी है !

बृजेश भाई जी, आप द्वारा प्रस्तुत यह संभवतः कोई पहली कुण्डलिया छंद है ?!..  इसके संयतपन से आपके प्रति अपेक्षाएँ कई गुना बढ़ गयी हैं .. 

बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें, भाईजी.

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 19, 2013 at 10:36am

वाह बहुत ही सुन्दर कुण्डलिया ब्रिजेश जी ,मन मोहक मुग्ध करते भाव ,हार्दिक बधाई आपको | मैं भी आदरणीय गणेश जी कि बात का समर्थन करती हूँ अंतिम पंक्ति यूँ हो जाए तो चारचांद लग जाएँ ----ये कैसा बैराग ? लुभाती है छवि तेरी |  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 19, 2013 at 10:17am
आदरणीय बृजेश भाई , सुन्दर कुंडलिया रचना के लिये हार्दिक बधाई !!!!
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 19, 2013 at 10:16am

बेहद सुंदर भाव, अनुपम रचना बहुत बहुत बधाई स्वीकारें आदरणीय बृजेश जी


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 19, 2013 at 9:33am

कान्हा तेरी बांसुरी, छेड़े ऐसी तान

जिसकी धुन में मन रमा, बिसरा सुध-बुध-ध्यान

बिसरा सुध-बुध-ध्यान, मोह के बंधन छूटे

जग है माया जाल, दरपन छन्न से टूटे

हुआ क्लेश का नाश, पीर हर ली सब मेरी

ये कैसा बैराग, ह्रदय छवि कान्हा तेरी । 

वाह बृजेश भाई, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति है, बधाई स्वीकार करें । 

Comment by शकील समर on October 19, 2013 at 9:20am

खूबसूरत आदरणीय बृजेश नीरज सर। हालांकि मुझे शिल्प की जानकारी नहीं है, पर भाव से अभिभूम हूं। बधाई स्वीकार करें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service