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दोहा -५ प्रेम पीयूष

सुन्दर प्रिय मुख देखकर, खुले लाज के फंद।
नयनों से पीने लगा, भ्रमर भाँति मकरन्द !!१

प्रेम जलधि में डूबता ,खोजे मिले न राह !
विकल हुआ बेसुध हृदय, अंतस कहता आह!!२

प्रेम भरे दो बोल मधु,स्वर कितने अनमोल !
कानों में सबके सदा ,मिश्री देते घोल !!३

रवि के जाते ही यहाँ ,हुई मनोहर रात !
चाँद निखरकर आ गया,मुझसे करने बात !!४

अधर पंखुड़ी से लगें ,गाल कमल के फूल !!
ऐसी प्रिय छवि देखकर, गया स्वयं को भूल॥५

मुझसे कहने आ गयी ,अपने दिल की बात !
लिए चाँदनी साथ में ,तारों की बारात !!६

उनके आते ही यहाँ,उड़ने लगी सुगंध !
धीरे धीरे टूटते, मर्यादा के बन्ध।!७

व्यथित ह्रदय अब ढूंढता,वही पत्र दो चार !
जिसमे तुमने था लिखा,तुमको मुझसे प्यार !!८

साँसों में मधु रागिनी, अधरों पर शुभ गीत।
मधुर कंठ की स्वामिनी, बना रही मन मीत॥९

************************************************

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by ram shiromani pathak on October 1, 2013 at 5:23pm

हार्दिक आभार आदरणीय विजय मिश्र जी //सादर 

Comment by रविकर on October 1, 2013 at 4:38pm

भादों में बरसे सरस, दोहों की सौगात |
भावों की तारीफ़ है, कह रविकर क्या बात ||


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 1, 2013 at 4:33pm

शृंगार रस में पगे सुन्दर दोहे

आपकी रचनाएं अब शिल्प पर सधती जा रही है..इस हेतु बधाई 

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 1, 2013 at 4:06pm

भाई राम शिरोमणि पाठक जी मुग्ध कर दिया भाई जी आपकी दोहावली ने वाह अत्यंत मनोहारी दोहावली वाह भाई वाह दिल से बधाई स्वीकारें.

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on October 1, 2013 at 2:32pm

बहुत सुन्दर राम भाई सुन्दर प्रेम भरे दोहे

इस अनुपम दोहावली पर बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by विजय मिश्र on October 1, 2013 at 1:49pm
"व्यथित ह्रदय अब ढूंढता,वही पत्र दो चार !
जिसमे तुमने था लिखा,तुमको मुझसे प्यार !!" - छू गयीं |अच्छी लिखी राम शिरोमणिजी . बधाई .
Comment by ram shiromani pathak on October 1, 2013 at 11:55am

गहनता संप्रेषण में तार्किक संबल चाहती है जो अध्ययन पश्चात मनन-मंथन का प्रतिफल हुआ करता है. फिरभी, प्रयासरत होना शुभ-संकेत है. ////// जी आदरणीय मै आपसे पूर्णतया सहमत हूँ। ….सदैव प्रयासरत रहूँगा

अनुमोदन व् अमूल्य सुझाव के लिए हार्दिक आभार आदरणीय सौरभ जी //सादर

Comment by ram shiromani pathak on October 1, 2013 at 11:53am

हार्दिक आभार आदरणीय भाई बसंत नेमा   जी //सादर 

Comment by ram shiromani pathak on October 1, 2013 at 11:52am

 हार्दिक आभार आदरणीय भाई जीतेन्द्र  जी //सादर 

Comment by ram shiromani pathak on October 1, 2013 at 11:51am

उत्साह वर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय गिरिराज जी //सादर 

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