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आता है हिन्दी दिवस जाने को तत्काल

संसंद में करते रहे, नेता टालम टाल

विकसित करना देश को तो मन में यह ठान

अपनी भाषा का सदा उन्नत रखना भाल |

(2)

हिन्दी में ही बोलकर रख भाषा का मान

भाषा की सम्पन्नता, है हिन्दी की शान

हीन भाव लाये बिना कर हिन्दी में बात

तब हिन्दी की विश्व में अमिट बने पहचान |

(3)

रोज मना हिन्दी दिवस करना गौरव गान

देवनागरी लिपि बनी, जो है इसकी शान

संस्कृति अरु साहित्य का उन्नत है भण्डार

सबको करना चाहिए भाषा पर अभिमान |

(मौलिक व् अप्रकाशित)

-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला 

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 25, 2013 at 10:19am

त्रुटियों की ओर ध्यान दिलाने की लिए धन्यवाद और मुक्तक सराहने के लिए आपका हार्दिक आभार श्री अरुण शर्मा अनंत"जी 

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 15, 2013 at 12:18pm

आदरणीय बेहद सुन्दर मुक्तक रचे हैं आपने बहुत ही सुन्दर ढेरों बधाइयाँ स्वीकारें एक दो जगह कंटक टाइपिंग में गलती हो है, तीसरे मुक्तक की प्रथम और चर्तुथ पंक्ति में २४ -२४ मात्राएँ हैं जबकि द्वतीय और तृतीय में 25-25 क्या ऐसा हो सकता है कृपया अवगत करायें.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 15, 2013 at 10:26am

नमष्कार भाई केवल प्रसाद जी,मुक्तक पसंद करने के लिए धन्यवाद | हिन्दी दिवस की आपको भी ढेरों बधार्इ एवं शुभकामनाए 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 15, 2013 at 10:19am

आदरणीय लड़ीवाला सर जी,  सादर प्रणाम!   अतिसुन्दर मुक्तक। हिन्दी दिवस की ढेरों बधार्इ स्वीकार करें।   सादर,

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 15, 2013 at 10:12am

मुक्तक सराहने के लिए आपका आभार श्री राम शिरोमणि पाठक जी |hindi दिवस की शुभकामनाए 

Comment by ram shiromani pathak on September 14, 2013 at 8:58pm
हुत सुंदर मुक्तक आदरणीय ///हिन्दी दिवस  की हार्दिक बधाई !!

केवल भाषा ही नहीं ,है भारत की शान !
फहरे सारे विश्व में ,इसकी ध्वजा महान !!
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 14, 2013 at 5:13pm

हिन्दी भाषा को मान देते मुक्तक छंद को सराहने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपाई जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 14, 2013 at 5:12pm

मुक्तक पसंद करने के लिए आपका ह्रदय से आभार डॉ आशुतोष मिश्रा जी 

Comment by annapurna bajpai on September 14, 2013 at 2:17pm

 

हिन्दी में ही बोलकर रख भाषा का मान

भाषा की सम्पन्नता है है हिन्दी की शान

हीन भाव लाये बिना कर हिन्दी में बात

तब हिन्दी की विश्व में अमित बने पहचान | ................. बहुत बढ़िया आदरणीय लड़ी वाला जी । सुंदर संदेश देती रचना आपको बहुत बधाई ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 14, 2013 at 1:43pm

बहुत ही शानदार मुक्तक ..मेरी तरफ से ढेरों बधाई 

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